रतलाम। शीतलहर और पाले से सरदी के मौसम में रबी की सभी फसलों को नुकसान होता है। इसमें रबी के सबसे प्रमुख फसल गेहूं, चना के अलावा तिलहन जैसे सरसों की फसलों को 80 से 90 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। वर्तमान में रतलाम जिले में 95 प्रतिशत रबी की फसलों की बोनी हो चुकी है। सभी फसलें अच्छी स्थिति में लहलहा रही है। सरसों की फसल में फूल और फलियां बनना शुरू हो गया है। वर्तमान में वातावरण में उण्डी हवाएं चल रही है। जो कि सरसो फसल को शीतलहर ओर पाले से बचाना आवश्यक है।
उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, जिला रतलाम नीलम सिंह चौहान ने बताया गया कि, देश के कई हिस्सों में ठण्ड का सितम बढता जा रहा है। किसान अपनी फसल की अच्छी पैदावार के लिये काफी मेहनत करते है। इसके लिये वह सिंचाई के सांथ-सांथ, फसलों में समय पर खाद भी देते है लेकिन किसानों को कई समस्याओ का सामना भी करना पडता है। इसलिये फसलों में कीट लगने के सांथ ही दिसंबर से फरवरी महीने तक ठण्ड के प्रकोप से फसलों पर पाले का खतरा भी रहता है। दरअसल सरसों की फसल का सबसे बडा दुश्मन पाला माना जाता है वही अब धीरे-धीरे शीतलहर का दौर जारी हो गया है। क्योंकि पहाडी इलाको में ठण्ड तेजी से बढने लगी है। जो सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिये मुसीबत का सबब बन सकती है।फसलों को पाले से बचाने के उपाय पाले से सरसों की फसल को बचाने के लिये सल्फर युक्त रसायनों का इस्तेमाल फायदेमंद साबित होता है। डाइमिथाईल सफ्लो ऑक्साईड का 0.2 फीसदी या 0.1 फीसदी थायोयूरिया का छिडकाव करें। वही यह छिडकाव 15 दिनों के अंदर पर फिर दोहरायें। इसके अलावा जब शीतलहर चलने लगे तब फसल में हल्की सिंचाई कर इससे फसल नष्ट होने से बच जायेगी।