भोपाल। मप्र फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रेशन में फर्जीवाड़े की शिकायतों के बीच अब स्टूडेंट्स नए रजिस्ट्रेशन के लिए परेशान हो रहे हैं। पोर्टल के बार-बार बंद होने की शिकायत आ रही है। इस बीच स्टेट फार्मेसी काउंसिल के सदस्यों ने हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव से मुलाकात कर इन सब मामलों को लेकर प्रभारी रजिस्ट्रार की शिकायत की है।
काउंसिल अध्यक्ष संजय जैन ने आरोप लगाया कि प्रभारी रजिस्ट्रार दिव्या पटेल रजिस्ट्रेशन में हुई गड़बड़ियों की जांच को लेकर गंभीर नहीं हैं। वे काउंसिल के कामों में रुचि नहीं ले रही हैं।
परिषद के सदस्यों ने अफसरों को बताया कि अगस्त 2023 के पूर्व फार्मेंसी में कई फर्जी रजिस्ट्रेशन हुए हैं। हर साल 9 हजार छात्र पासआउट हो रहे हैं, पर रजिस्ट्रेशन 11 हजार हो रहे हैं। यानी हर साल 2000 फर्जी रजिस्ट्रेशन। अभी मप्र में 85 हजार रजिस्ट्रेशन में से 20ः फर्जी होने की आशंका है। यह मामला पिछले साल सामने आया जब इंदौर पुलिस ने काउंसिल के 3 कर्मचारियों को पकड़ा था। इसके बाद फार्मेसी काउंसिल ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर एसीएस को भी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था।
25-30 हजार लेते थे फर्जी रजिस्ट्रेशन के लिए
पिछले साल इंदौर पुलिस को शिकायत मिली थी कि डीफार्मा, बीफार्मा और एमफार्मा की फर्जी मार्कशीट के आधार पर रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं। इसे दवा दुकान खोलने और फार्मा इंडस्ट्री में नौकरियों के लिए बेचा जा रहा है। पुलिस ने छापा मारकर काउंसिल के कर्मचारियों विजय शर्मा, सत्यनारायण पांडे और संजय तिलकवार को गिरफ्तार किया था। प्रत्येक ने मार्कशीट के आधार पर रजिस्ट्रेशन के लिए 25,000 से 30,000 रुपए तक वसूले गए। फिलहाल यह मामला इंदौर जिला न्यायालय में है।