भोपाल। मध्य प्रदेश और राजस्थान के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन रहा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में दोनों राज्यों के बीच समझौता हो गया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने समझौते पर हस्ताक्षर किया है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि आज पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के लिए एम ओ यू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के 11 और राजस्थान के 21 जिलों में पीने का पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राजस्थान में उद्योगों के लिए पानी उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी। इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश और राजस्थान को 70,000 करोड़ रुपए केंद्र की ओर से मिलेंगे। यह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सोच थी। उन्होंने 20 साल पहले यह सोचा था कि अब इस दिशा में आगे काम बढ़ गया है। इस नदी जोड़ो परियोजना से मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनों ही राज्यों को बड़ा फायदा होगा।
3217 गांवों को मिलेगा लाभ
इस परियोजना से मध्य प्रदेश के गुना, मुरैना, शिवपुरी, भिंड, श्योपुर, उज्जैन, सीहोर, मंदसौर, इंदौर, धार, आगर मालवा, शाजापुर और राजगढ़ जिलों के 3217 गांवों को लाभ मिलेगा। पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनों राज्यों के किसानों और नागरिकों के लिए वरदान साबित होगी। इससे किसानों को भरपूर सिंचाई के लिए पानी मिलेगा और विकास के नए द्वार खुलेंगे।
72,000 करोड़ रुपए होंगे खर्च
पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 72 हजार करोड़ है, जिसमें मध्यप्रदेश 35 हजार करोड़ और राजस्थान 37 हजार करोड़ रुपए व्यय करेगा। केंद्र की इस योजना में कुल लागत का 90 प्रतिशत केन्द्रांश और 10 प्रतिशत राज्यांश रहेगा। परियोजना की कुल जल भराव क्षमता 1908.83 घन मीटर होगी। साथ ही 172 मिलियन घन मीटर जल, पेयजल और उद्योगों के लिए आरक्षित रहेगा। परियोजना अंतर्गत 21 बांध/बैराज निर्मित किए जाएंगे।