नीमच। स्वर्ण प्राशन को सनातन धर्म के 16 संस्कारों में से एक संस्कार माना गया है। आज नीमच के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में 50 छोटे बच्चों को स्वर्ण प्राशन दवाई पिलाई गई। पिछले तीन वर्षों से सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में लगातार पुष्य नक्षत्र के अवसर पर यह आयोजन किया जाता है। उल्लेखनीय है कि पुष्य नक्षत्र को 27 नक्षत्रों में से सबसे शुभ माना जाता है और यह स्वर्ण का नक्षत्र है। इसलिए इस दिन स्वर्ण प्राशन को पिलाना शुभ माना गया है। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर की वाइस प्रिंसिपल प्रतिभा शर्मा ने बताया कि विद्यालय में आज 15 वर्ष तक के बच्चों को स्वर्ण प्राशन आयुर्वेदिक दवाई पिलाई गई। स्वर्ण प्राशन के सेवन से बच्चों का इम्यूनिटी और मेमोरी पावर बढ़ता है।डाइजेशन बेहतर रहता है। बच्चों का संपूर्ण विकास होता है,वे दीर्घायु होते है।