भोपाल। मां देवी अहिल्या की 300वीं जयंती पर श्विरासत से विकासश् के सिद्धांत पर मंगलवार को राजवाड़ा में हुई मप्र कैबिनेट की बैठक में कई बड़ी घोषणाएं हुईं। खास बात यह कि बैठक के बाद पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से महत्वाकांक्षी श्अहिल्या स्मारकश् प्रोजेक्ट को लेकर आधे घंटे तक बात की। इस दौरान पूरा मंत्रिमंडल मौजूद था। महाजन ने मंत्रिमंडल के समक्ष एलईडी पर अहिल्या स्मारक फेस-1 और फेस-2 का प्रेजेंटेशन भी दिया। ये स्मारक 100 करोड़ से तैयार होगा।
मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्रियों ने महाजन के जन संग्रह वाले प्रोजेक्ट को काफी सराहा। बड़ी बात यह कि इस मौके पर उद्योगपति और समाजसेवी विनोद अग्रवाल ने स्मारक प्रोजेक्ट के लिए 5 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इस प्रोजेक्ट को बारीकी से समझा।
मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि वे इसके लिए राज्य शासन और केंद्र से राशि दिलवाएंगे। महाजन ने इसके लिए पूर्व में ही मुख्यमंत्री से समय लिया था कि वह इस मामले में प्रेजेंटेशन देना चाहती हैं। इस पर कैबिनेट की बैठक के बाद इसके लिए समय तय हुआ था।
बैठक के तुरंत बाद महाजन के साथ समाजसेवी विनोद अग्रवाल, पुरुषोत्तम पसारी, अशोक डागा, मिलिंद महाजन, वास्तुविद हिमांशु दुधबढ़कर, श्रेया भार्गव, सांसद शंकर लालवानी, मेयर पुष्य मित्र भार्गव, पूर्व पार्षद सुधीर देडगे आदि मुख्यमंत्री मिले। महाजन ने मुख्यमंत्री को स्मारक के दोनों फेस को लेकर जानकारी दी।
उन्हें बताया कि दोनों फेस में कौन-कौन से काम होंगे। ताई ने बताया कि पुराने आरटीओ की जमीन मिलने के बाद अब पूरा फोकस जन संग्रह पर है। इसका उद्देश्य इस स्मारक के माध्यम से मां अहिल्या के पुण्य कार्यों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना है।
दूसरा फेस 50 करोड़ की लागत का
श्दैनिक भास्करश् ने पूर्व लोकसभा स्पीकर से बात की। उन्होंने बताया कि बैठक के बाद मैं मुख्यमंत्री को स्मारक के पूरे प्लान का प्रेजेंटेंशन देने गई थी। मैंने उन्हें बताया कि इसके लिए हम थोड़ा बहुत पैसा जनता से एकत्रित करने वाले हैं। मैंने उनसे आग्रह किया था कि कैबिनेट की बैठक के बाद मुझे 5-10 मिनट का समय दीजिए।
उन्हें बताया कि पहले फेस में 40 से 50 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके साथ ही सेकंड फेस के बारे में जानकारी दी। बताया कि मां अहिल्या ने पूरे हिन्दुस्तान में जो काम किए हैं, उसे थ्री डी या अन्य बेहतर तरीके से बताना है। स्मारक में एक रिक्रिएशन सेंटर हो जहां यह सब काम चलता रहे ताकि सभी को उनके किए कामों की जानकारी रहे।
कोठी में होगा अहिल्या बाई के चरित्र चित्रण और मराठों का इतिहास
पहले फेस में अभी कोठी ठीक करना है, यह बड़ी चुनौती है। कोठी मजबूत है लेकिन उसे पुराने तरीके से ही ठीक करनी पड़ेगी। उसे सीमेंट से रिपेयर नहीं किया जा सकता। इसमें अहिल्या बाई के चरित्र चित्रण की पेटिंग्स लगाई जाएगी। फिर इसमें मराठों का इतिहास भी दिखाएंगे कि मल्हारराव और बाजीराव पेशवा प्रथम और अन्य ने कैसा पराक्रम किया था।