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August 19, 2026, 2:49 pm
KHABAR : शिक्षकों से 15 करोड़ कमाने की तैयारी में सरकार, डेढ़ लाख शिक्षकों ने पात्रता परीक्षा का फॉर्म भरा तो शासन के खाते में आएगी मोटी रकम, पढे़ खबर

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भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मध्य प्रदेश में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आयोजित की जा रही है। परीक्षा के लिए ₹1,000 शुल्क तय किए जाने के बाद शिक्षक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। संगठनों का कहना है कि प्रदेश में करीब 1.50 लाख शिक्षक परीक्षा के दायरे में आ सकते हैं। ऐसे में केवल परीक्षा शुल्क से करीब ₹15 करोड़ जमा होने का अनुमान है।


शिक्षक संगठनों का सवाल है कि ये शिक्षक किसी नई नियुक्ति के लिए परीक्षा नहीं दे रहे हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में सेवा में बने रहने के लिए पात्रता परीक्षा दे रहे हैं। ऐसे में परीक्षा का खर्च शिक्षकों से लेना उचित नहीं है। संगठनों ने सरकार से परीक्षा शुल्क पूरी तरह माफ करने की मांग की है।


21 अगस्त से 9 सितंबर तक आवेदन
कर्मचारी चयन मंडल ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर प्राथमिक और माध्यमिक वर्ग के शिक्षकों के लिए 21 अगस्त से 9 सितंबर तक आवेदन प्रक्रिया तय की है। ₹1,000 परीक्षा शुल्क के अलावा एमपी ऑनलाइन और कियोस्क का शुल्क भी देना होगा।


शिक्षक संगठनों ने तब तक प्रदेश के शिक्षकों से फॉर्म नहीं भरने की अपील की है, जब तक परीक्षा शुल्क को लेकर सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं हो जाता।


सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद परीक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में आदेश दिया था कि वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने पर ही सेवा में बनाए रखा जाए। इसके बाद स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के करीब 1.50 लाख शिक्षक परीक्षा के दायरे में आने का अनुमान है।


शिक्षक संयुक्त मोर्चा की ओर से 26 अगस्त तक मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर परीक्षा शुल्क माफ करने की मांग रखने की तैयारी की जा रही है। संगठनों का तर्क है कि जब परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में सरकार करा रही है, तो इसका खर्च भी शासन को ही उठाना चाहिए।


दिल्ली में भी जुटेंगे शिक्षक
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित देशभर के शिक्षक 30 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटने की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षक संगठनों की ओर से केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने और शिक्षकों के हित में निर्णय लेने की मांग की जाएगी। राज्य अध्यापक संघ और शासकीय शिक्षक संगठन सहित अन्य संगठनों ने प्रदेश के शिक्षकों से दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया है।


विभाग के पास रिकॉर्ड, फिर सभी से आवेदन क्यों?
शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने सेवारत शिक्षकों की TET निःशुल्क कराने की मांग की है। संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल का कहना है कि यह परीक्षा शासन और शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुपालन का हिस्सा है, इसलिए इसका खर्च शिक्षकों से लेना उचित नहीं है।


उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के पास सभी सेवारत शिक्षकों का सेवा और शैक्षणिक रिकॉर्ड पहले से उपलब्ध है। विभाग यह भी जानता है कि कौन-से शिक्षक TET उत्तीर्ण कर चुके हैं और किन शिक्षकों को परीक्षा देना आवश्यक है। ऐसे में सभी शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन कराने के बजाय विभाग को पात्र शिक्षकों की सूची जारी करनी चाहिए।


ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन परीक्षा की मांग
शासकीय शिक्षक संगठन ने ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन TET कराने की मांग भी की है। संगठन का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, तकनीकी संसाधनों और सर्वर से जुड़ी समस्याओं के कारण शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।


अब शिक्षक संगठनों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। सवाल यही है कि सेवारत शिक्षकों की पात्रता परीक्षा का ₹1,000 शुल्क सरकार वापस लेती है या शिक्षकों को ही इसका भुगतान करना पड़ेगा।

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