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August 19, 2026, 1:56 pm
KHABAR : समान नागरिक संहिता विधेयक पर मुस्लिम इंतिजामिया कमेटी ने जताई आपत्ति, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर विधेयक पर पुनर्विचार और व्यापक परामर्श की मांग, पढ़े खबर 

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नीमच। मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 को लेकर जिला मुस्लिम इंतिजामिया कमेटी ने आपत्ति जताते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा है। कमेटी ने विधेयक के कुछ प्रस्तावित प्रावधानों को धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अधिकारों एवं मौलिक अधिकारों से जुड़ा विषय बताते हुए इसके वर्तमान स्वरूप पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

ज्ञापन में कमेटी ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 44 में नीति-निर्देशक तत्व के रूप में किया गया है, लेकिन इसे लागू करने से पहले देश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विविधता तथा विभिन्न समुदायों में प्रचलित व्यक्तिगत कानूनों को ध्यान में रखना आवश्यक है। कमेटी ने विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत एवं विवाह पंजीयन से संबंधित प्रस्तावित प्रावधानों पर भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

व्यक्तिगत कानूनों पर प्रभाव को लेकर जताई चिंता-
कमेटी ने व्यक्तिगत कानूनों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की। साथ ही फर्स्ट कजिन विवाह से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों तथा विभिन्न समुदायों में प्रचलित पारिवारिक व्यवस्थाओं पर भी पुनर्विचार की मांग की। ज्ञापन में अनुसूचित जनजातियों को प्रस्तावित छूट के संदर्भ में अन्य समुदायों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को भी समान रूप से ध्यान में रखने की बात कही गई है।

सभी पक्षों से व्यापक परामर्श की मांग-
कमेटी ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि विधेयक को लेकर सभी समुदायों, कानून विशेषज्ञों एवं प्रभावित पक्षों से व्यापक और सार्थक परामर्श किया जाए। कमेटी ने विधेयक को वर्तमान स्वरूप में वापस लेने अथवा उस पर रोक लगाने तथा संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

कमेटी का कहना है कि ऐसे महत्वपूर्ण कानून पर निर्णय लेने से पहले देश की विविध सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों का व्यापक अध्ययन और सभी संबंधित पक्षों से संवाद आवश्यक है।

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