नीमच। मालवा-मेवाड़ के अफीम किसानों में इस समय उबाल है। सैंपल जांच को लेकर उठे विवाद ने न सिर्फ किसानों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बढ़ते आक्रोश के बीच मामला अब सियासी रंग भी ले चुका है। राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने हस्तक्षेप करते हुए नारकोटिक्स कमिश्नर को पत्र लिखकर सैंपलों की दोबारा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पारंपरिक और संदेहास्पद तरीकों का उपयोग करने की मांग-
जानकारी के अनुसार, इस वर्ष किसानों द्वारा सरकार को सौंपे गए अफीम उत्पादन के सैंपलों की जांच रिपोर्ट को लेकर व्यापक असंतोष है। बड़ी संख्या में किसानों का आरोप है कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और बिना वैज्ञानिक मानकों के सैंपलों को ‘घटिया’ श्रेणी में रख दिया गया, जिससे उनके पट्टे कटने की नौबत आ गई है। किसानों का कहना है कि जांच में आधुनिक मशीनों के बजाय पारंपरिक और संदेहास्पद तरीकों का उपयोग किया गया।
30 ग्राम सैंपल की पुनः वैज्ञानिक जांच हो- राज्यसभा सांसद गुर्जर
सांसद बंसीलाल गुर्जर ने नारकोटिक्स कमिश्नर दिनेश बौद्ध को लिखे अपने पत्र में विशेष रूप से नीमच फैक्ट्री की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए 30 ग्राम सैंपल की पुनः वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आशंका जताई है कि जांच में गड़बड़ी हो सकती है, जिससे किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। सांसद ने स्पष्ट कहा कि जब तक सैंपलों की निष्पक्ष और तकनीकी आधार पर जांच नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी।
हजारों किसानों के पट्टे प्रभावित होने की संभावना-
इधर, किसानों का आरोप है कि जांच के नाम पर बाहरी आंकड़ों और अपारदर्शी प्रक्रिया का सहारा लिया गया, जिससे हजारों किसानों के पट्टे प्रभावित हो सकते हैं। कई किसानों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि जांच में गुणवत्ता तय करनी थी तो आधुनिक तकनीक और मशीनों का उपयोग क्यों नहीं किया गया।
किसानों में असंतोष, प्रशासन व संबंधित विभागों पर दबाव-
इस पूरे मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है और वे न्याय की मांग को लेकर संगठित हो रहे हैं। सांसद द्वारा उठाए गए मुद्दे के बाद अब प्रशासन और संबंधित विभागों पर दबाव बढ़ गया है कि वे जांच प्रक्रिया को स्पष्ट करें और आवश्यक हो तो दोबारा जांच कराएं। फिलहाल, यह मामला किसानों के भविष्य से जुड़ा हुआ है, ऐसे में सभी की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि सरकार और अफीम विभाग इस विवाद पर क्या निर्णय लेते हैं।