नीमच। शहर में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के बीच एक दिव्यांग व्यक्ति की रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है। परिवार के पालन-पोषण की चिंता में घिरे पीड़ित ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।
जनसुनवाई में पहुंचे ज्ञानप्रकाश खण्डेलवाल ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वे शारीरिक रूप से अक्षम हैं और मेहनत-मजदूरी करने में असमर्थ हैं। ऐसे में उन्होंने सीआरपीएफ रोड पर एक छोटी अस्थायी चाय की गुमटी लगाकर परिवार का गुजारा शुरू किया था। इसी आय से उनकी पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे की पढ़ाई और घर का खर्च चलता था।
अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान उनकी गुमटी भी हटा दी गई, जिससे उनका एकमात्र आय का साधन समाप्त हो गया। ज्ञानप्रकाश का कहना है कि उनके साथ हटाई गई अन्य गुमटियां दोबारा लग गई हैं, लेकिन उन्हें अब तक अनुमति नहीं मिल पाई है।
उन्होंने बताया कि वे कई बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं और तीन बार कलेक्टर कार्यालय भी पहुंच चुके हैं, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी।
अपनी शारीरिक और आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए उन्होंने प्रशासन से संवेदनशीलता दिखाने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि उन्हें पुनः गुमटी लगाने की अनुमति मिल जाए, तो वे अपने परिवार का पालन-पोषण सम्मानपूर्वक कर सकेंगे।
यह मामला केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं, बल्कि एक जरूरतमंद व्यक्ति की आजीविका और उसके परिवार के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।