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June 4, 2026, 4:49 pm
KHABAR : बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के नाम पर सियासत, कांग्रेस बोली- क्रांतिकारी का अपमान, मंत्री बोले-सरकार के पास नहीं आया प्रस्ताव इतिहासकार ने राजा भोज को लेकर किया बड़ा दावा, पढे़ खबर

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भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर “वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” करने के प्रस्ताव ने मध्य प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और सत्ताधारी दल भाजपा आमने-सामने आ गए हैं। जहां कांग्रेस इसे स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान बताकर राज्यपाल के पास जाने की तैयारी में है, वहीं सरकार का कहना है कि प्रस्ताव आने के बाद इस पर विचार किया जाएगा। इसी बीच इतिहासकारों ने भी इस पर अपनी अलग-अलग राय रखनी शुरू कर दी है।


आरिफ मसूद बोले -नई यूनिवर्सिटी बनाए, स्वागत करेंगे
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा, “बरकतुल्लाह का नाम बदलना बेहद अफसोसनाक है, इसकी जितनी निंदा की जाए वो कम है। मौलाना बरकतउल्ला आजाद भारत के महान क्रांतिकारी रहे हैं, उनके नाम को हटाना क्रांतिकारियों का अपमान है। भाजपा सरकार को नीट (NEET) के बच्चों और छात्रों के भविष्य पर चर्चा करनी चाहिए थी, लेकिन शिक्षा मंत्री इस पर विचार कर रहे हैं।”


मसूद ने आगे कहा कि अगर सरकार को ‘वाग्देवी’ के नाम पर कुछ करना है, तो नई यूनिवर्सिटी बनाए, हम सब स्वागत करेंगे। 38 साल से चल रही बनी-बनाई संस्था का नाम क्यों बदला जा रहा है? जब ‘भोज विश्वविद्यालय’ बना था, तब किसी ने विरोध नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को लेकर उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात का समय मांगा है।


राजीव गांधी विश्वविद्यालय का नाम हटाने की सुगबुगाहट
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) का नाम भी बदले जाने की चर्चाओं पर मसूद ने कहा कि राजीव गांधी का शरीर देश के लिए टुकड़ों में मिला था, उन्होंने देश के लिए शहादत दी। अगर उनका नाम भी बदला गया, तो देश देख रहा है कि भाजपा की सरकार क्रांतिकारियों और शहीदों के योगदान को नहीं मानती।


भाजपा का पलटवार: ‘जनता की भावना सर्वोपरि’
नाम बदलने के विवाद पर भाजपा ने भी अपना रुख साफ किया है। भाजपा का कहना है कि उनकी सरकार हमेशा जनता की भावनाओं के अनुरूप ही काम करती है। अगर जनता चाहती है कि यूनिवर्सिटी का नाम बदला जाए, तो निश्चित रूप से इस पर काम किया जाएगा, क्योंकि नाम हमारे गौरवशाली इतिहास के परिचायक होते हैं।


अभी प्रस्ताव सरकार के पास नहीं आया: मंत्री परमार
मामले पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “यह फैसला यूनिवर्सिटी की कार्य परिषद (Executive Council) की बैठक में लिया गया है। बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी एक ऑटोनॉमस (स्वायत्त) बॉडी है। यह प्रस्ताव अभी सरकार के पास नहीं आया है। जब प्रस्ताव शासन के पास पहुंचेगा, तब इसका पूरा अध्ययन किया जाएगा और उसके बाद ही सरकार इस पर कोई अंतिम फैसला लेगी।”


‘राजा भोज कभी भोपाल में नहीं रहे’
यूनिवर्सिटी का नाम बदलने के औचित्य पर इतिहासकार शाहनवाज खान ने एक नया ऐतिहासिक दृष्टिकोण सामने रखा है। उन्होंने दावा किया, “राजा भोज कभी भी भोपाल में नहीं रहे, न ही यहाँ उनका कोई महल था। वे मूल रूप से धार के राजा थे। भोपाल के लिए उनका योगदान सिर्फ ‘बड़ा तालाब’ बनवाना था, जिसके लिए भोपालवासी उनके शुक्रगुजार हैं।”


दोनों के योगदान की तुलना अपनी-अपनी जगह अलग
तालाब के निर्माण के पीछे की कहानी बताते हुए उन्होंने कहा कि राजा भोज को एक बीमारी हुई थी, जिसके इलाज के लिए उन्हें सात नदियों के पानी से नहाना था, इसीलिए इस बड़े तालाब का निर्माण कराया गया था। यहाँ तक कि प्रसिद्ध भोजपुर मंदिर भी भोपाल की सीमा से बाहर है। इसके विपरीत, मौलाना बरकतउल्ला को लेकर उन्होंने कहा कि उनका जन्म भोपाल में ही हुआ था और उन्होंने शुरुआती शिक्षा भी यहीं के स्कूल से ली थी। इसके बाद वे विदेश गए और वहां रहकर देश की आजादी के लिए गदर आंदोलन जैसे अभियानों के जरिए लड़ाई लड़ी। ऐसे में दोनों के योगदान की तुलना अपनी-अपनी जगह अलग है।

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