नीमच। जिला अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल से सामने आए कुछ फोटो और वीडियो में भर्ती मरीज ड्रिप लगी होने के बावजूद स्वयं या अपने परिजनों के साथ दवा लेने स्टाफ रूम तक जाते दिखाई दिए। वहीं, कुछ मरीजों और परिजनों ने आरोप लगाया कि ईसीजी सहित अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए भी उन्हें वार्ड से बाहर जाना पड़ता है, जिससे गंभीर मरीजों की परेशानी बढ़ रही है।
जानकारी के अनुसार, अस्पताल में भर्ती मरीजों को दवा उपलब्ध कराने के लिए कई बार नर्सिंग स्टाफ वार्ड में आने के बजाय मरीजों या उनके परिजनों को अपने कक्ष में बुला लेता है। ऐसे में ड्रिप चढ़ रही स्थिति में भी मरीजों को उठकर जाना पड़ता है। मरीजों का कहना है कि बेड पर ही दवा और उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो रही है, जिससे उन्हें अनावश्यक असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
महाराष्ट्र के बेस्ट सोशल वर्कर अवॉर्ड से सम्मानित डॉ. विजय बसंत सारवान ने भी जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि हार्ट मरीज अपने ससुर को ईसीजी के लिए स्वयं लेकर जाना पड़ा और शुरुआत में व्हीलचेयर तक उपलब्ध नहीं कराई गई। उनके अनुसार, गंभीर मरीजों के लिए इस तरह की व्यवस्था जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में भी जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं और सेवाओं में सुधार की आवश्यकता है, ताकि उपचार के दौरान मरीजों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
इधर, जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र पाटिल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि ड्रिप लगे मरीज को दवा लेने बुलाना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंभीर मरीजों की ईसीजी बेड पर ही की जाती है। यदि कहीं लापरवाही बरती गई है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इस घटनाक्रम ने एक बार फिर जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।