नीमच। आषाढ़ शुक्ल एकादशी के पावन अवसर पर शनिवार को नीमच नरेश के दरबार में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। देवशयनी एकादशी के अवसर पर सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भगवान के दिव्य दर्शन, विशेष पूजा-अर्चना और आकर्षक शाही श्रृंगार के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचे। पूरा मंदिर परिसर भजन, कीर्तन और जयकारों से भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।मान्यता है कि देवशयनी एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होता है।श्रद्धालु व्रत, पूजन और दान-पुण्य कर भगवान विष्णु से सुख, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करते हैं। चातुर्मास के दौरान विवाह, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है तथा साधना, भक्ति और आध्यात्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व बढ़ जाता है।मंदिर में भगवान का दिल्ली और कोलकाता से मंगाए गए सुगंधित पुष्पों से भव्य शाही श्रृंगार किया गया,। शाम को महाआरती, ताली कीर्तन और फलाहारी प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित गोपालजी शर्मा ने बताया कि देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु की आराधना का अत्यंत पुण्यदायी पर्व है। इस दिन की गई पूजा-अर्चना से भगवान श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है।देवशयनी एकादशी के अवसर पर नीमच नरेश का दरबार पूरे दिन श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहा।