सेगांव। विश्व पर्यावरण दिवस पर शासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए सेगांव ग्राम पंचायत में जिम्मेदार अधिकारियों ने ग्रामीणों को घंटों भटकाया। सुबह 11 बजे बुलाई गई विशेष ग्राम सभा दोपहर 1ः30 बजे तक नोडल अधिकारी देवराम पंवार और सचिव लंकेश निकुम के बिना ही भंग हो गई। गुस्साए ग्रामीणों ने मौके पर पंचनामा बनाकर कलेक्टर को शिकायत भेज दी है।
शुक्रवार होने से गांव में साप्ताहिक हाट बाजार था। इसके बावजूद ग्रामीण अपना काम-धंधा छोड़कर ग्राम पंचायत भवन पहुंचे थे। लेकिन नोडल अधिकारी और सचिव का कहीं अता-पता नहीं। जब मीडिया कवरेज के दौरान भी दोनों अधिकारी गायब रहे, तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
ग्राम पंचायत पंच धीरज मिश्रा ने सचिव पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, ष्ये सचिव हमेशा तानाशाही करता है। फर्जी और मनमानी तरीके से ठहराव प्रस्ताव बनाकर ग्राम सभा को मजाक बना देता है। ऐसे लापरवाह अधिकारी को तुरंत ग्राम पंचायत से हटाया जाए।
ग्रामीण दीपक गुर्जर उर्फ छोटू दादा ने सवाल उठाया, सुबह 11 बजे की सभा में दोपहर तक कोई नहीं पहुंचा। आखिर कब तक ये चलेगा? सचिव और नोडल पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
सरपंच ने बताया कि मंत्री से फोन पर बात हुई है, उन्होंने दोपहर 2 बजे के बाद आने की बात कही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सचिव को 2 बजे बाद आना था, तो ग्रामीणों को 11 बजे क्यों बुलाया गया? क्या ग्रामीणों के समय की कोई कीमत नहीं?
ग्रामीणों का साफ कहना है कि जिस अधिकारी के लिए उनका निजी काम जनता के काम से बड़ा हो, उसे घर का रास्ता दिखाना ही बेहतर है।
ग्रामीणों ने पंचनामा बनाकर कलेक्टर को शिकायत भेज दी है और सचिव लंकेश निकुम व नोडल अधिकारी देवराम पंवार पर तत्काल कार्रवाई व बर्खास्तगी की मांग की है। अब देखना है कि प्रशासन इस खुली लापरवाही पर क्या कदम उठाता है।