नीमच। वीरेन्द्र कुमार सकलेचा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नीमच के अस्थिरोग (ऑर्थाेपेडिक) विभाग ने अपना द्वितीय स्थापना दिवस उत्साहपूर्वक मनाया। मात्र दो वर्षों में विभाग जिले के हजारों मरीजों के लिए विशेषज्ञ उपचार का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। विभाग द्वारा अब तक लगभग 35 हजार मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया जा चुका है।
अस्थिरोग विभागाध्यक्ष एवं असिस्टेंट मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. पुनीत कुमार आचार्य ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना से पहले गंभीर फ्रैक्चर, जटिल अस्थिरोग समस्याओं और शल्य चिकित्सा के लिए मरीजों को इंदौर, उदयपुर सहित अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। अब अधिकांश आधुनिक अस्थिरोग सेवाएं जिला चिकित्सालय नीमच में ही उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों का समय, धन और परेशानी बच रही है।
उन्होंने बताया कि विभाग की शुरुआत दो वर्ष पूर्व सीमित संसाधनों के साथ हुई थी। वर्तमान में भी विभाग में फैकल्टी के रूप में केवल डॉ. आचार्य ही सेवाएं दे रहे हैं, बावजूद इसके विभाग ने उपचार, सर्जरी और प्रशिक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
एक वर्ष में 19 हजार से अधिक मरीजों का उपचार-
जून 2025 से मई 2026 के दौरान विभाग की ओपीडी में 19,371 मरीजों का उपचार किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 29 प्रतिशत अधिक है। इस अवधि में 955 मरीज भर्ती हुए, 246 सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की गईं तथा लगभग 4 हजार प्लास्टर, ड्रेसिंग और अन्य अस्थिरोग प्रक्रियाएं की गईं। विभाग में दो सफल ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी भी की गई हैं।
निःशुल्क इम्प्लांट सुविधा बनी राहत-
डॉ. आचार्य ने बताया कि पहले मरीजों को ऑपरेशन के लिए इम्प्लांट स्वयं खरीदने पड़ते थे, लेकिन अब विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से पात्र मरीजों को निःशुल्क इम्प्लांट एवं सर्जरी की सुविधा मिल रही है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को विशेष लाभ हुआ है।
अत्याधुनिक मॉड्यूलर ओटी में शुरू हुई सर्जरी-
मई 2026 से विभाग में अत्याधुनिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी शुरू कर दी गई है। आधुनिक तकनीक और उन्नत संक्रमण नियंत्रण सुविधाओं से युक्त यह ओटी कई निजी अस्पतालों की सुविधाओं से भी बेहतर माना जा रहा है।
शिक्षा एवं प्रशिक्षण में भी अग्रणी-
विभाग केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पिछले दो वर्षों में तीन सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर अपनी सीनियर रेजिडेंसी सफलतापूर्वक पूर्ण कर चुके हैं और अब मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी पदों के लिए पात्र हो गए हैं। वर्तमान में विभाग में डॉ. अतुल सोलंकी, डॉ. अनुराग चौधरी एवं डॉ. हितेश रणसरिया वरिष्ठ चिकित्सकों के मार्गदर्शन में सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
जल्द शुरू होंगी सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं-
सिविल सर्जन एवं मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. महेंद्र पाटिल ने बताया कि विभाग में जल्द ही ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, स्पाइन सर्जरी और आर्थाेस्कोपी जैसी उन्नत सेवाएं शुरू की जाएंगी। इसके लिए आवश्यक उपकरण एवं इम्प्लांट की खरीद प्रक्रिया जारी है।
विभाग की उपलब्धियों की सराहना-
स्थापना दिवस समारोह के मुख्य अतिथि डीन प्रो. डॉ. आदित्य बैराड़ ने विभाग की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि अल्प समय में अस्थिरोग विभाग ने जिले की जनता का विश्वास जीता है और भविष्य में यह क्षेत्र का अग्रणी अस्थिरोग केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि निःशुल्क इम्प्लांट सुविधा, आधुनिक मॉड्यूलर ओटी और आगामी सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं जिलेवासियों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करेंगी।