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June 11, 2026, 2:19 pm
KHABAR : गिरदावली पोर्टल की खराबी से किसान परेशान, 17 दिनों में 650 में से मात्र 5 पंजीयन, औने-पौने दाम पर मूंग और उड़द बेचने का डर, पढे़ खबर

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ढीमरखेड़ा। कटनी जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की फसल बेचने के लिए समर्थन मूल्य पर किसानों के पंजीयन का कार्य 25 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलना है। लेकिन अंतिम तिथि नजदीक आने के बावजूद गिरदावली पोर्टल पर डेटा दर्ज न होने के कारण अन्नदाता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि किसान रोजाना सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन तकनीकी खामी के कारण उनके पंजीयन नहीं हो पा रहे हैं।


18 दिनों में सिर्फ 5 पंजीयन
सॉफ्टवेयर और पोर्टल की इस लेत-लतीफी का सबसे बड़ा उदाहरण ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र के ग्राम झिन्ना पिपरिया की आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में देखने को मिला है। कुल अनुमानित पंजीयन 650 किसान। 17-18 दिनों में हुए कुल पंजीयन मात्र 5 किसान। लंबित पंजीयन 645 किसान। सोसाइटी ऑपरेटर सुरेश सोनी ने बताया, “गिरदावली दर्ज न होने के कारण पोर्टल पर किसानों की जानकारी ही प्रदर्शित नहीं हो रही है। इस तकनीकी समस्या की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है। पंजीयन न होने से किसान रोजाना नाराज होते हैं और समिति में आए दिन वाद-विवाद की स्थिति बन रही है।


मेहनत की फसल को कौड़ियों के दाम बेचने की चिंता
किसानों को अब यह चिंता सताने लगी है कि यदि 15 जून तक पंजीयन नहीं हुआ, तो भारी लागत और कड़ी मेहनत से उगाई गई मूंग-उड़द की फसल को उन्हें खुले बाजार में व्यापारियों को कम दामों (औने-पौने दाम) पर बेचना पड़ेगा। परेशान किसानों ने शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है कि गिरदावली की इस तकनीकी समस्या का तत्काल निराकरण किया जाए ताकि वे अपनी उपज का सही मूल्य पा सकें।


पंजीयन की अंतिम तारीख 15 जून
इस पूरे गंभीर मामले को लेकर जब ढीमरखेड़ा एसडीएम निधि गोहल ने तकनीकी खराबी की बात स्वीकार की। जिले में सबसे ज्यादा गिरदावली का कार्य ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र में ही पूर्ण हुआ है। यह कोई तकनीकी समस्या हो सकती है, जिसके कारण गिरदावली पोर्टल में दर्ज नहीं दिख रही है। झिन्ना पिपरिया समिति के संबंध में पूरी जानकारी लेकर इस तकनीकी खराबी को जल्द से जल्द सुधारा जाएगा और किसानों के लिए सुचारू व्यवस्था बनाई जाएगी। अब देखना यह होगा कि पंजीयन की अंतिम तारीख (15 जून) में महज कुछ दिन शेष रहने के बीच प्रशासन इस तकनीकी गड़बड़ी को कितनी जल्दी दुरुस्त कर पाता है।

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