उज्जैन। गुरुवार को भगवान महाकाल की सवारी में शामिल होने वाले हाथी श्यामू को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया। पिछले करीब नौ माह से श्यामू के स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं और उसका इलाज विशेषज्ञों की निगरानी में चल रहा है।
गुरुवार को पन्ना टाइगर रिजर्व, इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीम हाथी का स्वास्थ्य परीक्षण करने और ब्लड सैंपल लेने पहुंची, लेकिन हाथी के मालिक और परिजनों ने इसका विरोध कर दिया। विवाद बढ़ने के बाद टीम बिना ब्लड सैंपल लिए लौट गई और केवल मल-मूत्र के नमूने लेकर जांच करने का निर्णय लिया।
इंदौर रोड स्थित साईनाथ कॉलोनी में पहुंची टीम में इंदौर चिड़ियाघर प्रभारी उत्तम यादव, उज्जैन के पशु चिकित्सक डॉ. मुकेश जैन और पन्ना टाइगर रिजर्व के डॉ. संजय गुप्ता शामिल थे। मौके पर हाथी श्यामू जंजीरों से बंधा हुआ मिला।
टीम ने स्वास्थ्य जांच के लिए इंजेक्शन लगाकर खून का नमूना लेने की कोशिश की, लेकिन हाथी के मालिक सरमन गिरी और उनके परिवार ने इसका विरोध करते हुए टीम को सैंपल नहीं लेने दिया। काफी देर तक बहस और गहमागहमी चलती रही। आखिरकार टीम ने केवल मल और मूत्र के नमूने लेकर जांच कराने का फैसला किया।
डॉक्टर बोले- कभी भी गिर सकता है हाथी
पशु चिकित्सक डॉ. मुकेश जैन ने बताया कि हाथी श्यामू वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत शेड्यूल-1 श्रेणी का वन्यजीव है। टीम नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पहुंची थी। उन्होंने बताया कि हाथी के पैरों में गंभीर समस्या है और उसके पैर मुड़ने लगे हैं।
ऐसी स्थिति में वह चलते-चलते कभी भी गिर सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि बीमारी की सही स्थिति जानने के लिए ब्लड टेस्ट जरूरी था, लेकिन विरोध के कारण यह नहीं हो सका।
मालिक ने कहा- हाथी पूरी तरह स्वस्थ
हाथी के मालिक सरमन गिरी ने टीम के दावों को खारिज करते हुए कहा कि श्यामू पूरी तरह स्वस्थ है और उसके सभी वैध दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि 2006 से हाथी का स्वामित्व उनके नाम पर है। उनका आरोप है कि कुछ लोग हाथी को यहां से हटाकर वनतारा या किसी चिड़ियाघर में भेजना चाहते हैं, इसलिए उसे बीमार बताया जा रहा है।
सरमन गिरी ने कहा कि यदि हाथी के पैरों में इतनी गंभीर समस्या होती तो वह वर्ष 2016 से लगातार भगवान महाकाल की सवारी में कैसे शामिल होता। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर श्यामू अनफिट है तो फिर उसे महाकाल मंदिर की सवारी में शामिल करने की अनुमति क्यों दी गई।
सितंबर 2025 से चल रहा है विवाद
हाथी श्यामू के स्वास्थ्य और उसके रखरखाव को लेकर सितंबर 2025 से विवाद जारी है। इससे पहले भी वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम हाथी का परीक्षण करने और उसे अन्य सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया के तहत पहुंच चुकी है। हालांकि हर बार हाथी के मालिक ने उसे स्वस्थ बताते हुए कार्रवाई का विरोध किया है।
अब मल और मूत्र के नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हाथी श्यामू वास्तव में किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है या नहीं। फिलहाल महाकाल की सवारी में शामिल होने वाले इस हाथी को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।