भिंड। पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी के पुत्र और इंग्लैंड की एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रेजिडेंट भरत चतुर्वेदी ने शुक्रवार को लेह पहुंचकर बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने दलाई लामा से विभिन्न समसामयिक विषयों को लेकर विस्तार से चर्चा की। मुलाकात के दौरान दलाई लामा ने भरत चतुर्वेदी को एक पुस्तक भी भेंट की।जिसे उन्होंने ससम्मान अपने पास संजोकर रखा।
दलाई लामा से मुलाकात का बताया गहरा अनुभव
भरत चतुर्वेदी ने दलाई लामा से मुलाकात को अपने जीवन का महत्वपूर्ण और गहरा अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि दलाई लामा के साथ बातचीत के दौरान समाज,देश और वर्तमान परिस्थितियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने दलाई लामा के विचारों और सहज व्यक्तित्व को करीब से अनुभव किया। भौगोलिकसंदर्भ
चंबल की धरती से हिमालय तक एक भारत का संदेश
मुलाकात के दौरान भरत चतुर्वेदी ने दलाई लामा के सामने चंबल संभाग और यहां के लोगों की भावना को भी रखा। उन्होंने कहा कि भले ही चंबल की धरती और हिमालय के बीच भौगोलिक दूरी है। लेकिन दोनों क्षेत्रों के लोगों की आत्मा और भारत के प्रति भावनाएं एक है।उन्होंने कहा कि चंबल के खेत-मजदूर से लेकर हिमालय के साधु तक भारत की आत्मा एक ही है।
अंतिम व्यक्ति तक न्याय और बराबरी की बात
भरत चतुर्वेदी ने कहा कि समाज में वंचित और कमजोर वर्ग के पक्ष में खड़े होना, बराबरी की लड़ाई लड़ना और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना ही राष्ट्र और समाज सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है।उन्होंने कहा कि देश की मजबूती तभी संभव है।जब समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और समान अवसर मिले।
चंबल के युवाओं की वीरता का किया उल्लेख
भरत चतुर्वेदी ने दलाई लामा को चंबल क्षेत्र के युवाओं की ऊर्जा और देशभक्ति के बारे में भी बताते हुए कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वालों में चंबल अंचल के युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।चंबल की धरती के लाल भारत माता की रक्षा और देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। भौगोलिकसंदर्भ
दलाई लामा ने समाजसेवा के लिए किया प्रेरित
मुलाकात के दौरान भरत चतुर्वेदी के सामाजिक सरोकारों और सहज व्यवहार की भी चर्चा हुई। उनके अनुसार दलाई लामा ने समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर समाजहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। भरत चतुर्वेदी एक जनप्रतिनिधि होने के साथ-साथ समाजसेवा के कार्यों में भी सक्रिय रहते हैं और लोगों के सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहने का हमेशा प्रयास करते है।
यादगार बनी मुलाकात
दलाई लामा से मुलाकात के दौरान मिली पुस्तक को भरत चतुर्वेदी ने विशेष स्मृति के रूप में संजोकर रखा।चंबल की सामाजिक भावना, युवाओं की देशभक्ति और समाज के कमजोर वर्गों के लिए काम करने की प्रतिबद्धता को लेकर हुई यह मुलाकात उनके लिए यादगार रही।