भोपाल। मध्य प्रदेश में बिजली सप्लाई का सिस्टम इन दिनों बुरी तरह लड़खड़ा गया है। राज्य में बिजली की मांग और उत्पादन के बीच बड़ा अंतर आने के कारण ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक बिजली संकट गहराने लगा है। स्थिति यह है कि राज्य में एक दिन में लगभग 15,000 मेगावाट बिजली की जरूरत और खपत है, जबकि उत्पादन मात्र 12,000 से 13,000 मेगावाट के बीच ही हो रहा है। लगभग 2,000 से 3,000 मेगावाट की इस भारी कमी के चलते बिजली कंपनियों ने अलग-अलग इलाकों में कटौती का फैसला लिया है, जिससे ग्रामीण अंचलों में कई घंटों तक बिजली गुल रहने लगी है।
क्यों अचानक बढ़ी बिजली की मांग?
अचानक मांग बढ़ने और संकट पैदा होने के पीछे मुख्य रूप से कृषि संबंधी जरूरतें और मौसम का फेरबदल माना जा रहा है।निमाड़ अंचल में इस बार मानसून के दौरान बारिश कम होने के कारण किसानों ने रबी फसलों के लिए ‘पलेवा’ (बुवाई से पहले खेत की सिंचाई) का काम समय से पहले ही शुरू कर दिया है। भोपाल संभाग समेत प्रदेश के अन्य जिलों में धान की पकी फसलों को फिलहाल पकने के अंतिम चरण में पानी की सबसे ज्यादा आवश्यकता है, जिससे कृषि फीडर पर लोड अत्यधिक बढ़ गया है। हालिया चक्रवाती तूफानों और मौसम में आए बदलाव के कारण भी बिजली ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था प्रभावित हुई है।
कैबिनेट से लेकर सड़कों तक गरमाया मामला, नेताओं के फोन घनघनाने लगे
बिजली कटौती का यह मुद्दा अब प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक मंचों तक गर्मा गया है। हाल ही में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में भी यह मामला खुलकर उठा था। मंत्रियों ने खुद स्वीकार किया था कि बिजली कटौती को लेकर देर रात तक उनके पास पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता के फोन बज रहे हैं। किसान संघ ने भी इस अघोषित कटौती पर कड़ी आपत्ति जताई है।
विधायक जयवर्धन सिंह का पत्र
कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने अपर मुख्य सचिव (ACS) को पत्र लिखकर अघोषित और अनियमित बिजली कटौती पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि लोडशेडिंग के नाम पर अनिश्चित समय तक बिजली काटने से किसानों की रबी बुवाई संकट में है। इसके साथ ही, नवरात्रि के इन दिनों में पूजा-आरती के समय हो रही बिजली कटौती से धार्मिक आयोजनों में भी व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने बिजली कटौती का वास्तविक कारण और शेड्यूल सार्वजनिक करने की मांग की है।
जल्द ही यह दिक्कत दूर कर ली जाएगी
बिजली संकट के बीच भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने सफाई देते हुए कहा कि इस बार बारिश की स्थिति अनुकूल नहीं रही और कई प्राकृतिक परिस्थितियों व तूफानों के कारण यह स्थिति बनी है। सरकार पूरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रही है। जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी बात रखना उनका अधिकार है और सरकार वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी तेजी से ध्यान दे रही है, जल्द ही यह दिक्कत दूर कर ली जाएगी।
धान और सोयाबीन की फसलें बर्बाद
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के द्वारा पूर्व में उठाए गए मुद्दों को दोहराते हुए कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता राजुल राज ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ‘कृषि कल्याण वर्ष’ मनाया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। एक तरफ धान और सोयाबीन की फसलें बर्बाद हो रही हैं, तो दूसरी तरफ सरकार सस्ती बिजली बाहर बेच रही है और महंगी बिजली खरीद रही है। गांवों में 10 घंटे भी ढंग से बिजली नहीं मिल पा रही है, जिससे बीजेपी के अपने सांसद, विधायक और मंत्री तक परेशान हैं।