BIG NEWS : प्रसिद्ध समाजसेवी अशोक अरोरा पर फायरिंग केस में बड़ा मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का जमानत आदेश, शाद उर्फ शाहिद की बढ़ी मुश्किलें, फिर जाएगा जेल की सलाखों के पीछे, पढ़े खबर
नीमच। करीब ढाई साल पहले नीमच में समाजसेवी अशोक अरोरा पर हुई गोलीबारी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जिस हमले में सरेआम गोलियां चली थीं और आरोपी पक्ष का ही एक साथी बाबू फकीर मारा गया था, उसी मामले में अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मुख्य आरोपी शाद उर्फ शाहिद मंसूरी की जमानत निरस्त हो गई है। सर्वाेच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत शाहिद मंसूरी को जमानत मिली थी। साथ ही उसे आदेश की तारीख से दो सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा अन्य आरोपियों से तुलना के आधार पर शाहिद मंसूरी को जमानत दिए जाने के फैसले पर आपत्ति जताई। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह भी आया कि चार्जशीट के अनुसार मामला सामान्य मारपीट का नहीं, बल्कि सुपारी किलिंग का गंभीर प्रकरण है। 4 फरवरी 2024 को हुई थी फायरिंग- 4 फरवरी 2024 की शाम नीमच में समाजसेवी अशोक अरोरा पर फायरिंग की घटना हुई थी। घटना के दौरान हमलावरों की ओर से गोलियां चलाई गई थीं। इसी दौरान आरोपी पक्ष का साथी बताए गए बाबू फकीर को भी गोली लगी थी, जिसकी मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और अलग-अलग आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की। पुलिस कार्रवाई के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में हथियार, कारतूस और वारदात में इस्तेमाल किए गए वाहनों की बरामदगी का भी उल्लेख किया गया है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में अशोक अरोरा को गोली लगने से हाथ में चोट आने का उल्लेख है। रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि मामले में आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था। हाईकोर्ट से मिली थी जमानत- मामले में शाद उर्फ शाहिद मंसूरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बाद पीड़ित पक्ष की ओर से हाईकोर्ट के जमानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट द्वारा अन्य आरोपियों के साथ तुलना के आधार पर जमानत देने के आधार पर सवाल उठाया गया। सर्वाेच्च न्यायालय ने मामले की प्रकृति और चार्जशीट में दर्ज आरोपों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट के जमानत आदेश को निरस्त कर दिया। सामान्य मारपीट का मामला नहीं- सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता पर टिप्पणी की। अदालत के समक्ष रखे गए रिकॉर्ड के संदर्भ में कहा गया कि चार्जशीट के अनुसार यह सामान्य मारपीट का मामला नहीं, बल्कि सुपारी किलिंग से जुड़ा गंभीर प्रकरण है। हालांकि, मामले में अंतिम दोषसिद्धि अभी नहीं हुई है और ट्रायल की प्रक्रिया जारी है। इसलिए आरोपों पर अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के बाद ही होगा। 14 दिन में करना होगा आत्मसमर्पण- वरिष्ठ अभिभाषक मनीष जोशी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने शाद उर्फ शाहिद मंसूरी को आदेश की तारीख से दो सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। निर्धारित अवधि में आरोपी को ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होना होगा। जोशी के अनुसार, मामले में गवाहों के परीक्षण की प्रक्रिया अभी शेष है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब ट्रायल की आगामी प्रक्रिया संबंधित न्यायालय में आगे बढ़ेगी। फिर चर्चा में आया नीमच का बहुचर्चित मामला- अशोक अरोरा पर हुए हमले के बाद से ही यह मामला नीमच में चर्चित रहा है। पुलिस जांच में कई आरोपियों की भूमिका सामने आने के बाद गिरफ्तारियां हुई थीं। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा शाहिद मंसूरी की जमानत निरस्त किए जाने और आत्मसमर्पण के निर्देश के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश फिलहाल आरोपी की जमानत से संबंधित है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि या दोषसिद्धि ट्रायल कोर्ट में गवाहों और अन्य साक्ष्यों के परीक्षण के बाद होगी।