पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र की दिल्ली सरकार से बंगाल में अफीम की खेती की अनुमति मांग कर एक नयी बहस को जन्म दे दिया है। इस आशय की जानकारी सीएम ममता बनर्जी ने 10 मार्च को विधानसभा में देते हुए कहा की जब पोस्तादाना बंगालियों के मेन्यू में शामिल है तो फिर हम अफीम की खेती क्यों नहीं कर सकते।
सीएम ममता बनर्जी ने बंगाल में अफीम की खेती की मांग पहली बार नहीं की। इससे पहले 2020 में उन्होंने भुवनेश्वर में केंद्रीय मंत्री अमित शाह से भी कहा था कि बंगाल को अफीम की खेती की इज़ाज़त दी जाए।
बंगाल में अफीम की खेती करने के पीछे सीएम ममता बनर्जी तर्क देती है कि बंगाल के लोग हर रोज़ पोस्तादाना खाते हैं और वे 1000 रूपए किलो खरीदते हैं। जबकि हम यदि खेती करते हैं तो 100 किलो में पोस्तादाना मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पोस्तादाना में किसी भी प्रकार का नशा नहीं होता, हमारे किसान जब बेहतर कर रहे हैं तो फिर अफीम की खेती हमें क्यों नहीं करने दी जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि मैं विपक्ष के सदस्यों से इस पर केंद्र को पत्र लिखने के लिए कहूंगी।
गौरतलब है कि अफीम की खेती देश में प्रतिबंधित है और केंद्र सरकार की निगरानी में एमपी, राजस्थान और यूपी के कुछ हिस्सों में यह खेती की जाती है। वैसे जानकारी के अनुसार बंगाल के कुछ हिस्सों में अफीम की अवैध खेती की खबरें आती रही है और वहां एजेंसिया कार्यवाही भी करती रही है, लेकिन इस नए पेंच के बाद केंद्र सरकार अफीम के मुद्दे पर बंगाल में घिरती नज़र आ रही है।
वैसे मालवा - मेवाड़ में इस खेती के मामले में भाजपा पहले ही मुश्किल में है और यहां के किसान सीपीएस पद्धति को हटाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में सीएम ममता बनर्जी की इस मांग पर केंद्र क्या रुख अपनाता है यह देखने वाली बात होगी।