इंदौर। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव-2018 के बाद 2020 में हुए उपचुनावों में उतरे प्रत्याशियों को आयकर विभाग ने नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस नामांकन पत्र में दर्शाई संपत्ति और निवेश का स्रोत पता करने के लिए विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग ने भेजे हैं। प्रमुख पार्टियों सहित निर्दलीय लड़ने वालों को भी संपत्ति में हुए इजाफे को लेकर स्पष्टीकरण देने के लिए विभाग से नोटिस भेजे जा रहे हैं। इंदौर जोन में आने वाले 10 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें चुनाव लड़े प्रत्याशियों को यह नोटिस भेजे जा रहे हैं।
इन्वेस्टिगेशन विंग द्वारा हर बार चुनाव के डेढ़ से दो साल के अंदर यह कार्रवाई की जाती है। 28 सीटों पर हुए उपचुनाव के लिए भेजे जा रहे यह नोटिस दरअसल 2021-22 में ही आ जाने चाहिए थे, लेकिन किन्हीं कारणवश देरी से भेजे गए हैं। इन्वेस्टिगेशन विंग को यदि सबूत मिलते हैं कि आय छुपाई गई है और रिटर्न भरते समय टैक्स के दायरे से छूट ली गई है, तो मामला असेसमेंट विंग को सौंपा जाएगा, जो विधिवत स्क्रूटिनी करते हुए मामले में ऑर्डर जारी कर डिमांड भी निकाल सकती है। जिन्हें नोटिस भेजे गए हैं, उन्हें स्वयं या अपने किसी अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से, एक निर्धारित तारीख पर इंदौर आयकर भवन में उपस्थित होने और मांगी गई जानकारी के अनुसार साक्ष्य और लेखा पुस्तकों को लाने का आदेश दिया गया है। नोटिस पर इन्वेस्टिगेशन विंग के किसी भी अधिकारी ने कोई भी बयान देने से इनकार किया है।
10 विधानसभा क्षेत्र इंदौर जोन के शामिल नोटिस के दायरे में 2020 में हुए उपचुनाव के लिए भेजे गए थे नोटिस 2018 नवंबर से अक्टूबर 2020 तक का हिसाब मांगा नोटिस में सवाल- रोजमर्रा के खर्च कैसे निकालते हो?
आपके द्वारा चुनाव में दिए गए एफिडेविट के अनुसार नवंबर 2018 से अक्टूबर 2020 तक आपकी और आपके पति/ पत्नी की चल-अचल संपत्ति में निर्धारित इतने लाख रुपए का इजाफा हुआ है, जिसमें से बैंक खाते में रखे बैलेंस में इतने लाख रुपए का इजाफा हुआ है। बैंक खातों से स्पष्ट होता है कि आपके खातों में इतनी राशि जमा हुई है और इतनी राशि खर्च हुई है। अगर आपके द्वारा खर्च समस्त राशि से आपकी चल-अचल संपत्ति बढ़ी है, तो आपके रोजमर्रा के खर्च आपने कैसे वहन किए, इसका स्पष्टीकरण दीजिए।
महिला प्रत्याशियों से उनके द्वारा घोषित सोने के जेवर में बढ़ोतरी होने पर उसके बिल या गिफ्ट होने पर साक्ष्य मांगे हैं। कृषि पेशे से जुड़े प्रत्याशियों से उनकी खेती संबंधी जानकारी मांगी गई है कि कौन सी फसल बोई, कितनी पैदावार हुई, खेती से आय, पटवारी खसरा नकल आदि। प्रत्याशियों द्वारा घोषित एफडी और शेयर्स में निवेशित राशि का मिलान भी आईटीआर से किया जा रहा है और आय का स्रोत पूछा जा रहा है।
नामांकन फॉर्म में प्रत्याशी द्वारा चल-अचल संपत्ति का बाजार मूल्य दर्शाया जाता है जो बिना किसी अतिरिक्त निवेश के बढ़ता है। इसका भी स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। ऐसे में वो प्रत्याशी, जिनके पास पुरानी खरीदी हुई अचल संपत्ति है, वे सिर्फ अपनी संपत्ति के असली कागज दिखाकर बढ़े हुए मूल्य का स्पष्टीकरण दे सकते हैं, जिसमें उनकी किसी प्रकार की आय खर्च नहीं हुई हो। गाइडलाइन का प्रमाण देकर, संपत्ति में हुए इजाफे को समझाया जा सकता है।