एमपी में मोहन सरकार एक्शन में आ चुकी है सबसे ख़ास बात यह है कि सीएम मोहन यादव (एमवाय) स्वयं धरातल से जुड़े है और उन्हें जनता से जुड़े मुद्दों का खासा पता है। इसीलिए जैसे ही उन्होंने पद संभाला पहला आदेश यह दिया की रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण किया जाए। सीएम साहब ने एक बयान में यह भी कहा की पटवारी गौर से सुन लें यदि नामांतरण नहीं किया तो कड़ी कार्रवाही करूंगा और यह कार्रवाही पटवारी के साथ उस जिले के कलेक्टर पर भी होगी। उन्होंने यह भी कहा की अफसर कितना भी बड़ा हो जनहित के कामों में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जायेगी।
सीएम मोहन यादव के इन तेवरों से ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप है, क्योकि अफसरों को दुनिया बदली-बदली लग रही है। इसका ख़ास कारण यह है की पिछली चार बीजेपी सरकारों के मुखिया शिवराज सिंह चौहान थे और अफसर उनके काफी नज़दीक आ गए थे। इस कॉक्स में कुछ ख़ास आईएएस और आईपीएस अफसर थे जो हर काम को अपने मुआफ़िक करते थे। साथ ही अफसरों के साथ शिवराज सिंह चौहान की क़रीबियां भी बेहद हो गई थी। इसीलिए उनके तमाम कार्यक्रमों का मैनेजमेंट अफसर देखते थे। उसका परिणाम यह हुआ कि अफसरों ने बीजेपी नेताओं की सुनना बंद कर दी। यहां तक की जिलों में कलेक्टर भी सीधे सीएम से बात करने के कारण विधायकों और मंत्रियों को उतनी लिफ्ट नहीं देते थे, जितनी प्रजातांत्रिक व्यवस्थाओ में दिया जाना चाहिए।
यानि की सब कुछ सेट राइट था, ऐसा लगता था काम अफसरों के हाथ में है, इस बार भी बीजेपी को ज्योही बहुमत मिला अफसरों का वो कॉकस तत्काल एक्टिव हो गया, लेकिन उनको क्या पता था इस बार मोदी जी पूरी सितौलिया बिखेर देंगे और अबकी बार सीएम कोई और बनेगा।
ऐसे में जब कमान मोहन यादव को मिली तो अफसरों का वो कॉकस हतोत्साहित हो गया और उनके चेहरों का रंग उड़ गया। शिवराज सिंह चौहान की जमावट के बीच मोहन यादव को अपनी बिसात बिछाना एक चुनौती थी, लेकिन कमान संभालते ही उन्होंने जिस तरह से पारी की शुरुआत की ब्यूरोक्रेसी को लग गया की अब अफसरी नहीं चलेगी।
यदि निर्णयों के हिसाब से देखंे तो एमपी पडोसी राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ से आगे निकलता दिखता है और मोहन यादव एक प्रभावी सीएम की तरह काम करते नज़र आते है। ऐसे में प्रदेश की जनता को उम्मीद बंधी है कि कई ऐसे मामले जो अफसरशाही ने बेवजह सालों से कानूनी पेंचों में उलझा रखे थे, उन पर मोहन सरकार तत्काल एक्शन लेगी और आम आदमी को राहत मिलेगी। फिलहाल सीएम मोहन यादव को मंत्री मंडल का गठन और ब्यूरोक्रेसी की जमावट भी करनी है। ऐसे में लगता है मंत्री मंडल के गठन के बाद सीएम मोहन यादव की पारी देखने लायक होगी।