चित्तौड़गढ़। ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र प्रताप नगर पर राजयोगिनी आशा दीदी ने बताया कि राष्ट्र का असली निर्माण चरित्र से होता है। हमारी संस्कृति सिखाती है की सबसे बड़ा धन ज्ञान है। उन्होंने कहा कि एक ज्ञानी और चरित्रवान व्यक्ति के पीछे स्थूल धन स्वत ही आता है। उन्होंने कहा कि हमारा मूल स्वरूप शांत है झुकना कमजोरी नहीं है झुकने से व्यक्ति की महानता और बढ़ जाती है। आज मन की शक्ति बहुत तेजी से कम हो रही है जिस कारण समय की कमी महसूस होती है। एक कमजोर मन ही गुलामी का अनुभव करता है मानसिक दबाव को कम करने के लिए अंतरिक्ष शक्ति को बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान बहुत जरूरी है, इसलिए प्राचीन भारतीय संस्कृति में बच्चों को गुरुकुल में शिक्षा दी जाती थी। उन्होंने कहा कि जीवन में खुशी के लिए नहीं बल्कि खुशी के साथ-साथ हर कार्य करें, क्योंकि खुशी हमारी खुद की चॉइस है। खुशी के लिए दूसरों पर निर्भर ना रहे। उन्होंने कहा कि आज हम भावनात्मक रूप से मजबूत होने की जरूरत है जितना भावनात्मक रूप से शक्तिशाली होंगे उतना ही आध्यात्मिक चेतना विकसित होगी। रोज अपने लिए एक घंटा दे अपने आप से बातें करें और अपनी भावनाओं को कंट्रोल में रखें। उन्होंने बताया कि राजयोग के अभ्यास से हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं, और हमारा मन शक्तिशाली बनता है, हम सही निर्णय सही समय पर ले पाते हैं।