चीताखेड़ा। हे आनंद उमंग भयो जय हो नंदलाल की......,आलकी के पालकी जय कन्हैया लाल की....., हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की.........इस तरह के जयकारों की गूंज सोमवार को पूरे अंचल के मंदिरों में रही। भगवान विष्णु के आठवें अवतार देवकी नंदन भगवान श्री कृष्ण का धर्म ग्रंथो के मुताबिक पौराणिक कथाओं के अनुसार द्वापर युग में 5251 सालों पूर्व इसी तिथि पर जन्माष्टमी के दिन जन्म आधी रात को प्राकट्योत्सव हुआ था। तब से लेकर आज तक पूरे देश और दुनिया में भाद्रपद माह के अष्टमी तिथि के दिन भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाता है। माखन -मिश्री, पंजीरी,चरनामृत का नैवेद्य लगाकर प्रसाद वितरण की गई। फोड़ी दही की हांडियां, हुई मटकी फोड़ प्रतियोगिता । वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी जन्माष्टमी पर्व को लेकर दिन भर रिस्त-नातेदारों एवं फेसबुक व्हाट्स ऐप पर फ्रेंड को बधाईयों का दौर जारी रहा।
इस वर्ष जन्माष्टमी पर्व के अवसर पर इस दिन नटखट बाल किशोर लड्डू गोपाल का भव्य अभिषेक,मनमोहक श्रृंगार और अलौकिक पूजा अर्चना की गई । साथ ही कृष्ण भक्त लड्डू गोपाल के आगमन की खुशी में व्रत रखे। अंचल भर के घरों से लेकर सभी देवालयों तक भगवान श्री कृष्ण का आधी रात को जन्मोत्सव मनाया गया। भगवान के जन्मोत्सव के अवसर पर गांव-गांव गली मोहल्ले में बाल मंडल,गोविंदाओं की टोलियों द्वारा दही की हाड्डियां फोड़ की प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। किसी ने पिरामिड बनाकर तो किसी ने आंखों पर पट्टी बांध कर तो किसी ने नारियल से निशाना साधकर दही की हांडियां फोड़कर प्रतियोगिता जीती।
अंचल भर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर सुबह से लेकर देर रात तक मंदिरों पर भक्तों ने पहुंचकर दर्शन, पूजन लाभ लेने का सिलसिला जारी रहा। श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर माणक चौक स्थित चारभुजा नाथ मंदिर, माली मौहल्ले में स्थित शिव मंदिर, नायनखेडी में स्थित चारभुजा नाथ मंदिर पर आकर्षक विद्युत सज्जा के साथ ही क्षेत्र के रहवासियों ने भी जन्मोत्सव लेकर अपने -अपने घरों में भी विद्युत सज्जावट की। मंदिरों के अलावा घर- घर में परिवार के लोगों ने लड्डू गोपाल की पूजा अर्चना की ओर भगवान के लिए विशेष तौर पर झूला बनाया और उसमें झूलाया गया। सोमवार की रात्रि 12 बजते ही मंदिरों में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर घंटी -घड़ियाल, शंख की ध्वनि घनघना उठी और हे आनंद उमंग भयो जय हो नंदलाल की........., हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की..........,जय जय श्री कृष्णा......., बंशी वाले की...., सांवलिया सेठ की..... , मुरली मनोहर की...... जैसे कई जयकारों से देवालय गूंज उठे। भगवान श्री कृष्ण को माखन -मिश्री, पंजिरी, चरनामृत का भोग लगाकर महाप्रसादी वितरण किया।