ग्वालियर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विविध संगठन प्रचारक प्रशिक्षण वर्ग के चौथे दिन रविवार को युवा शक्ति, यूपी विधानसभा चुनाव और घर-घर तक पहुंचने के लिए श्हर घर दस्तक अभियानश् पर चर्चा हुई। आरएसएस ने प्रचारकों को युवाओं पर ध्यान केंद्रित करने की जिम्मेदारी सौंपी। उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले घर-घर पहुंचकर सामाजिक समरसता का माहौल बनाने के लिए कहा गया है।
मई 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा को विपक्षी गठबंधन से कड़ी टक्कर मिली थी। 2027 में यहां विधानसभा चुनाव होने हैं। इसीलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सामाजिक पहलुओं के साथ राजनीतिक पहलुओं पर खुलकर चर्चा की। आरएसएस प्रमुख सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सभी प्रचारकों के विचार भी जाने।
31 से शुरू होकर 4 नवंबर तक चलेगा प्रचारक प्रशिक्षण वर्ग
ग्वालियर के केदारपुर धाम में दीवाली (31 अक्टूबर) से 4 नवंबर तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विविध संगठन प्रचारक प्रशिक्षण वर्ग चल रहा है। इसमें आरएसएस के 31 संगठनों के 554 प्रचारक शामिल हुए हैं। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित संघ के सभी सह सरकार्यवाह और अन्य प्रमुख पदाधिकारी भी शामिल हुए हैं।
चार दिवसीय प्रचारक वर्ग में वे ही कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं, जो सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रहते हैं। यह एक तरह का प्रशिक्षण वर्ग माना जा रहा है, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्र और वर्ग के बीच संघ कार्यों की समीक्षा और आगामी वर्षों के कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा हो रही है।
युवाओं के साथ काम करने के लिए दिया मंत्र
आरएसएस सूत्रों से पता लगा है कि रविवार को प्रचारक वर्ग के सत्र की शुरुआत भारत माता की पूजा के साथ हुई। इसके बाद सभी प्रचारकों से युवाओं को ज्यादा से ज्यादा जोड़ने को कहा गया। उत्तरप्रदेश में आगामी समय में राजनीतिक और सामाजिक माहौल पर विचार मांगे गए।
आखिर में सभी प्रचारकों को युवा शक्ति को ज्यादा से ज्यादा अपने विचारों से परिचित कराने और उनसे संपर्क करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। संघ ने 2012 में जॉइन आरएसएस (वेबसाइट के जरिए) प्रारंभ किया था। इसके अंतर्गत ऑनलाइन माध्यम से प्रतिवर्ष एक से सवा लाख युवा संघ के साथ विविध गतिविधियों में जुड़ रहे हैं। इस साल भी जून के अंत तक 66529 लोगों ने संपर्क कर संघ से जुड़ने की इच्छा जताई थी।
सभी पदाधिकारियों से संघ का संदेश घर-घर पहुंचाने का आह्वान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक वर्ग में कई मुद्दों पर मंथन हो रहा है, लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा हिंदू समाज में सामाजिक समरसता है। आरएसएस सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को प्रचारक वर्ग में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले की मौजूदगी में कार्यकारी मंडल के पदाधिकारियों ने संगठन के सभी 11 क्षेत्र तथा 46 प्रांत प्रचारकों को संघ के एजेंडे, जिसमें पंच परिवर्तनों के द्वारा हिंदू समाज में सामाजिक समरसता लाने के प्रयास के लिए इस संदेश को निचले स्तर तक ले जाने की जिम्मेदारी सौंपी। साथ ही सभी पदाधिकारियों से संघ का संदेश घर-घर पहुंचाने का आह्वान किया।
सारे इंतजाम संघ के कार्यकर्ता कर रहे
प्रशिक्षण वर्ग में सभी व्यवस्थाएं संघ के कार्यकर्ता संभाल रहे हैं। अंदर की सुरक्षा से लेकर मंच तक का प्रबंधन आरएसएस के कार्यकर्ता ही देख रहे हैं। आने वाले अतिथियों के लिए भोजन से लेकर स्वागत का इंतजाम भी संघ के सदस्यों के जिम्मे है। सभी को मीडिया से दूर रहने और अंदर की बात बाहर नहीं जाने की सख्त हिदायत है।
आरएसएस में प्रचारक ही होता है उद्देश्य को पूरा करने की चाबी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रचारक संघ का प्रशासन होता है। कोई भी उद्देश्य व विचार के आम सदस्य, कार्यकर्ता व आम लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रचारक की होती है। यह प्रचारक बनना आम बात नहीं है। इसकी शर्तें ही अपने आप में इसे चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रचारक वही बन सकता है, जो अविवाहित हो। प्रचारक में से ही कोई बाहर निकलकर भाजपा का क्षेत्रीय संगठक व अन्य विभिन्न पदों पर जाते हैं।