चित्तौड़गढ़। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश महेन्द्र सिंह सिसोदिया के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जन साहस संस्था के संयुक्त तत्वाधान में “महिलाओं और बच्चों के यौन और अन्य प्रकार के शोषण के प्रति व्यापक प्रतिक्रिया के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण चिंतन और आगे का रास्ता” विषय पर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर की अध्यक्षता कर रहे सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुनील कुमार गोयल ने महिलाओं एवं बच्चों के प्रति होने वाले यौन शोषण एवं अन्य प्रकार के शोषण यथा घरेलु हिंसा, जबरन वैश्यावृति, बालश्रम, बालविवाह, बालतस्करी आदि के बारे उपस्थित सदस्यों को अवगत करवाते हुए इन कुरूतियों एवं अपराधों के लिए बने हुए कानूनों यथा पॉस एक्ट 2013, घरेलु हिंसा अधिनियम 2005, बालश्रम निषेध अधिनियम 2016 आदि के बारे में जानकारी दी तथा बताया कि महिलाओं एवं बच्चों के प्रति तेजी से बढ़ते हुए यौन अपराध एक चिंता का विषय है। यौन हिंसा सिर्फ शारीरिक हानि ही नहीं पहुँचाता बल्कि इससे मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। अतः हमारा यह कर्तव्य बनता है कि यौन हिंसा से पीड़ित महिलाओं एवं बच्चों के प्रति सहानुभूति रखते हुए इस अपराध के प्रति सजग रहें तथा ऐसे किसी अपराध को छुपाने की बजाय अपराधी को सजा दिलाने का प्रयास करें।
इस दौरान प्रियंका पालीवाल अध्यक्ष बाल कल्याण समिति,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सांखला, प्रकाश जीनगर अधीक्षक राजकीय किशोर एवं सम्प्रेक्षण गृह,नीतू जोशी प्रभारी सखी वन स्टॉप सेन्टर, अरूणा राठौड़ सदस्य जेजेबी, पैनल अधिवक्ता भारती गहलोत, संदीप सेठिया एवं जनसाहस संस्था के सदस्यगण आदि जन उपस्थित रहे।