भोपाल। ग्वालियर हाई कोर्ट परिसर में बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने साफ कहा कि इस मामले में कांग्रेस अधिकृत स्टैंड पहले ही रख चुकी है। हमारा स्टैंड साफ है कि कांग्रेस पार्टी बाबा साहब अंबेडकर की मूर्ति जिसकी प्रशासनिक तौर पर स्वीकृति हाईकोर्ट ने दी है वह वहां लगनी चाहिए। चौधरी ने यह बात दिल्ली में आयोजित की जा रही प्रेस कान्फ्रेंस में कही। बता दें कि केंद्र में मोदी सरकार के 11 साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री भोपाल में प्रेस कान्फ्रेंस करेंगे, जिसमें सरकार की उपलब्धियां गिनाई जाएंगी। उससे पहले कांग्रेस हमलावर हो गई है।
चौधरी ने कहा- एक सोची समझी सोच के तहत आरएसएस विवाद उत्पन्न कर रही है। वर्ग संघर्ष कराना चाहती है। यह शुरू से उन लोगों की रणनीति रही है। मुरैना में जिस प्रकार से ज्ञापन दिए गए हैं नया विवाद खड़ा करने की कोशिश है। देश में संविधान और बाबा साहब के संदर्भ में वह शुरुआत कर रहे हैं, इस मामले में कांग्रेस पार्टी का बड़ा स्पष्ट स्टैंड है। संविधान और दूसरे क्षेत्र में डॉ. अंबेडकर के योगदान को कांग्रेस और पूरा देश मानता है।
केंद्र और राज्य सरकार दूर करे बाधाएं
चौधरी ने कहा कि बाबा साहब किसी एक वर्ग के नहीं हैं, पर वह (आरएसएस) लगातार प्रयास कर रही है कि उनको एक वर्ग तक सीमित कर दिया जाए। संविधान के माध्यम से प्रत्येक नागरिक को अधिकार देने में बाबा साहब का सबसे बड़ा योगदान है। कांग्रेस ग्वालियर हाई कोर्ट परिसर में लगने वाली मूर्ति के संदर्भ में जो भी बाधाएं आ रही हैं उन बाधाओं को दूर करने के लिए भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार से अपील करती है कि जो बाधाएं उन्होंने खुद ने उत्पन्न की हैं। उनका निपटारा करे।
पहले भी हाईकोर्ट परिसर में मूर्तियां लगीं
वह कहते हैं कि जब निर्णय हो चुका था और ऐसी भी बात नहीं है कि हाईकोर्ट परिसर में मूर्ति की स्थापना पहली बार हो रही है। इससे पहले देश के हाईकोर्ट परिसरों के भीतर मूर्तियां स्थापित हो चुकी हैं, लेकिन सिर्फ विवाद उत्पन्न करने के लिए, वर्ग संघर्ष कैसे पैदा हो, उसी मंशा से यह विवाद उन लोगों ने मूर्ति स्थापना के विवादों के अंदर घसीटा है। मेरा दोनों सरकारों से आग्रह है कि उनकी सोच जो भी है उस पर विराम लगे। संविधान में विश्वास रखने वाले हर वर्ग, जाति के लोग चाहते हैं कि बाबा साहब की मूर्ति की स्थापना ग्वालियर में हो। कांग्रेस को जो करना होगा वह करेगी, लेकिन उन (आरएसएस) को रणनीति में सफल नहीं होने देगी। पहले भी उन्होंने गांधी जी, नेहरु जी के संदर्भ में प्रयास किए हैं, उनमें उनका सफल नहीं होने देंगे।
भाजपा, आरएसएस और नरेंद्र मोदी दलित विरोधी
दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में जीतू पटवारी ने कहा भाजपा, आरएसएस और नरेंद्र मोदी ये सब संस्थागत दलित विरोधी हैं, अंबेडकर विरोधी, आरक्षण विरोधी और संविधान विरोधी हैं। ग्वालियर हाई कोर्ट में अंबेडकर प्रतिमा लगाने का घटनाक्रम ताजा है, जिस पर आमजन चर्चा कर रहे हैं। कोर्ट की अनुमति के बाद भी प्रतिमा न लग पाना सबसे बड़ा मामला बना हुआ है।
आदिवासी वर्ग से नहीं हुआ सरसंघ संचालक
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा स्थिति मुद्दों से ध्यान भटकाने की बन रही है। आरएसएस की सोच है, उन्होंने छोटे वर्ग को कभी सम्मान नहीं दिया। आरएसएस में अभी तक जितने भी सरसंघ संचालक बने, उनमें कोई आदिवासी नहीं है। इससे स्पष्ट होता है कि देश में किस प्रकार से वर्ग संघर्ष करना चाहती है। यह भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस की सोच है। आज मोदी सरकार के 11 साल पूरे हो रहे हैं, लेकिन मुद्दों से ध्यान भटकाए जाते हैं। अंबेडकर प्रतिमा की स्थापना को लेकर बीजेपी-आरएसएस इतिहास बदलना चाहते हैं। राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले गांधीजी, अंबेडकर, चंद्रशेखर आजाद ऐसी महान हस्तियां हैं, जो देश और समाज से ऊपर रहे हैं। उन्हें किसी समाज से नहीं जोड़ा जा सकता है।
सिंघार ने कहा कि देश सबका है बीजेपी-आरएसएस राष्ट्रभक्ति की बात करती है। जब अंबेडकर मूर्ति का विवाद होता है तो इनकी देशभक्ति-राष्ट्रभक्ति कहां जाती है। जब सरदार सरोवर डैम बना तो आपने सरदार पटेल की मूर्ति लगाई कांग्रेस ने सम्मान किया। तो भाजपा क्यों किसी वर्ग विशेष को लेकर भेदभाव कर रही है। क्या वो वोट कांग्रेस के साथ रहे इसलिए भेदभाव कर रहे हैं। ये बीजेपी की डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी है। कम वोटों पर कैसे सरकार बनाई जाती है यह केंद्र सरकार में सब ने देखा। एक सोची समझी रणनीति के तहत भाजपा अब इतिहास बदलना चाहती है।