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August 8, 2025, 6:53 pm
NEWS : राजस्थान सनातन संस्कृति की मूल चेतना को सजीव बनाए रखने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा में होगा श्रावणी उपाकर्म संस्कार का आयोजन, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़। राजस्थान सनातन संस्कृति की मूल चेतना को सजीव बनाए रखने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा में श्रावणी उपाकर्म का विशेष स्थान है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए, चित्तौड़गढ़ की प्रख्यात धार्मिक एवं वैदिक संस्था ओम तत्सत् पारमार्थिक न्यास द्वारा आगामी 9 अगस्त 2025 (शनिवार) को, श्रावण शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के पावन दिवस पर, ऐतिहासिक रत्नेश्वर कुंड दुर्ग पर एक भव्य श्रावणी उपाकर्म संस्कार का आयोजन किया जा रहा है।
यह आयोजन मार्गदर्शक डॉ. गोरांग पानेरी के सान्निध्य और धर्मप्रेमी विद्वज्जनों के मार्गदर्शन में संपन्न होगा, जिसका उद्देश्य केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को वेद, ऋषि संस्कृति और सनातन मूल्यों की ओर प्रेरित करना भी है। श्रावणी उपाकर्म जिसे उपनयन पुनरावृत्ति या जनेऊ परिवर्तन संस्कार भी कहा जाता है, वैदिक जीवन का अभिन्न अंग है। जिसमें द्विज (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य) विशेष विधि से पवित्र यज्ञोपवीत धारण कर वेदाध्ययन का नूतन संकल्प लेते हैं। शास्त्रों के अनुसार उपाकर्म करने से विगत वर्षों में अनजाने में किए गए पापों का प्रायश्चित होता है और आत्मशुद्धि, ऋषियों के प्रति कृतज्ञता तथा आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। इस आयोजन में संपूर्ण वैदिक विधि से श्रावणी उपाकर्म की क्रियाएं संपन्न कराई जाएंगी, जिनमें प्रातः कुंड पर दर्शनीय पुण्य स्नान, प्रायश्चित संकल्प, देव ऋण, पितृ ऋण एवं ऋषि ऋण तर्पण, ऋषि पूजन, यज्ञोपवीत पूजन, नवीन यज्ञोपवीत धारण, वेद मंत्रों का सामूहिक पाठ तथा आचार्यों के प्रेरक धर्माेपदेश सम्मिलित हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि संस्कृति शिक्षा शिविर के रूप में भावी पीढ़ी को धर्म, कर्तव्य और आत्मिक साधना से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा। 
संस्था का यह मानना है कि जब युवाओं को धर्म का समुचित वातावरण और योग्य मार्गदर्शन मिलता है, तब वे न केवल जीवन में सफल होते हैं, बल्कि धर्मरक्षा में भी अग्रणी भूमिका निभाते हैं। सभी धर्मनिष्ठ ब्राह्मण बंधुओं, छात्रवर्ग, विद्वानजनों और श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे इस पुण्य अवसर पर समय पर उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करें। कार्यक्रम पूर्णतः निःशुल्क है, किंतु सभी से विनम्र निवेदन है कि वे स्नान हेतु वस्त्र साथ लाएं और श्रद्धा, अनुशासन तथा समर्पण के भाव से इस आयोजन में सहभागी बनें। कार्यक्रम का समय प्रातः 09.15 बजे रखा गया है और स्थान रहेगा रत्नेश्वर कुंड, दुर्ग, चित्तौड़गढ़। यह आयोजन संस्था के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य पं. विकास उपाध्याय (मो. 9950477654) के नेतृत्व में और संस्था के संयोजन में संपन्न होगा।

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