मनासा। तहसील क्षेत्र के ग्राम पिपलिया खुर्द में जमीन सीमांकन के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि मामला पत्थरबाजी, मारपीट और हंगामे में बदल गया। घटना में महिलाओं सहित कई लोग घायल हो गए। पीड़ित पक्ष ने थाना प्रभारी पर रिपोर्ट दर्ज करने में लापरवाही और घायलों को मेडिकल के लिए देर से भेजने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
मनासा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव पिपलिया खुर्द में 19 मई 2026 को हल्का नंबर 269/6 के खेत के सीमांकन के लिए राजस्व अमला मौके पर पहुंचा था। पटवारी गिरधरवार और उनकी टीम द्वारा सीमांकन कार्य किया जा रहा था, तभी दोनों पक्षों के बीच पुराना जमीन विवाद फिर से उभर आया।
पीड़ित पक्ष के अनुसार आरोपी पक्ष ने सीमांकन कार्य में बाधा डालते हुए राजस्व अमले को धमकाया और कहा कि “यहां से चले जाओ, नहीं तो दंगा-फसाद हो जाएगा।” स्थिति तनावपूर्ण होने पर राजस्व टीम वहां से लौट गई, लेकिन इसके बाद मामला और बिगड़ गया।
आरोप है कि कुछ ही देर बाद आरोपी पक्ष ने अचानक पत्थरों, लकड़ियों और हाथों से हमला कर दिया। इस दौरान महिलाओं सहित परिवार के लोगों के साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकियां भी दी गईं। पीड़ितों का कहना है कि हमले के दौरान एससी/एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी देकर दहशत फैलाने का प्रयास किया गया।
घटना में ओकारलाल धनगर, तेजराम धनगर, रमेश धनगर, मुकेश धनगर, मोहनबाई और संतोषबाई घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल मोहनबाई और संतोषबाई को प्राथमिक उपचार के बाद जिला चिकित्सालय रेफर किया गया।
नीमच। जिला अस्पताल में दोनों महिलाओं का उपचार जारी है। इसी दौरान पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी द्वारा रिपोर्ट दर्ज करने में लापरवाही बरती गई और घायलों को लगभग तीन घंटे तक थाने में बैठाए रखा गया, जिसके बाद मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया।
पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि घटना की सूचना डायल 112 पर देने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन कार्रवाई में देरी की गई। अब पीड़ित पक्ष ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं में मामला दर्ज करने, निष्पक्ष जांच करने और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।