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July 14, 2026, 1:38 pm
KHABAR : केन-बेतवा परियोजना के विरोध में चिता आंदोलन तेज, श्न्याय दो या मार दोश् के नारों के बीच आमरण अनशन जारी, पढे़ भरत यादव की खबर

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छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगांव, रूंज, नैगुवा और एनटीपीसी से जुड़े कथित पुनर्वास एवं अनियमितताओं के विरोध में छतरपुर में चल रहा आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और आदिवासी महिलाओं के नेतृत्व में जारी चिता आंदोलन मंगलवार को 11वें दिन में प्रवेश कर गया, जबकि अमित भटनागर का आमरण अनशन आठवें दिन भी जारी रहा।

आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन के दौरान चिता, मिट्टी, जल, सांकेतिक फांसी और सूली जैसे प्रतीकों के माध्यम से विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि यह प्रदर्शन विस्थापित परिवारों की पीड़ा और न्याय की मांग को सामने लाने का प्रयास है।

आंदोलनकारियों के अनुसार, परियोजना प्रभावित परिवारों को अब तक उचित पुनर्वास और मुआवजा नहीं मिला है। उनका आरोप है कि पुनर्वास प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियां हैं, खेती की जमीन छिनने से आजीविका का संकट खड़ा हो गया है और वर्षों से शिकायतों के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।

आमरण अनशन कर रहे अमित भटनागर के समर्थकों का दावा है कि अनशन के आठवें दिन उनकी तबीयत बिगड़ने लगी है। वहीं पांच दिन से अनशन पर बैठी पूना आदिवासी की तबीयत भी खराब होने का दावा किया गया। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सकीय व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई।

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन बिना ग्राम सभा की सहमति, पारदर्शी सर्वे और सम्मानजनक पुनर्वास के विस्थापन स्वीकार नहीं करेंगे। आंदोलन के दौरान ष्न्याय दो या मार दोष् के नारे लगाए गए।

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिलता तथा कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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