उज्जैन। महाकाल मंदिर में दान चोरी रोकने को लेकर दिए गए बयान के बाद शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। पुजारियों के बिना जेब वाले कुर्ते पहनने और मंदिर में मेटल डिटेक्टर लगाने की बात कहने वाले महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद के खिलाफ महाकाल सेना ने कार्रवाई की मांग की है।
सोमवार को महाकाल सेना ने परमानंद जी महाराज को पत्र लिखकर उन्हें चारधाम मंदिर के पद से हटाने की मांग की थी। वहीं, विवाद बढ़ने पर महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद ने महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश पुजारी से माफी मांगते हुए कहा कि अगर उनकी किसी बात से ठेस पहुंची है तो वे क्षमा चाहते हैं।
श्पद से नहीं हटाने पर होगा आंदोलनश्
महाकाल सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री किशन पांडेय ने परमानंद जी महाराज को लिखे पत्र में कहा कि महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद के बयान से चारधाम की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। पत्र में मांग की गई है कि उन्हें चारधाम के पद से हटाया जाए।
पत्र में यह भी लिखा गया है कि यदि उन्हें पद से नहीं हटाया गया तो महाकाल सेना उनके विरोध में आंदोलन करेगी और सरकार से चारधाम के सरकारीकरण की मांग भी करेगी।
महामंडलेश्वर बोले- अगर बुरा लगा हो तो माफी
महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद ने कहा कि उन्हें पूरी जानकारी नहीं थी कि किस विषय पर चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि महेश पुजारी महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी हैं और कई वर्षों से संगठन के लिए काम कर रहे हैं। यदि उनकी किसी बात से उन्हें ठेस पहुंची है तो वह उनसे माफी मांगते हैं।
उन्होंने कहा कि सभी साधु-संतों और पुजारियों को सनातन धर्म के लिए मिलकर काम करना चाहिए। सिंहस्थ महापर्व भी आने वाला है, इसलिए सभी को एकजुट रहना चाहिए।
कुछ दिन पहले दान चोरी के मामलों पर चर्चा के दौरान अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद ने कहा था कि चोरी रोकने के लिए पुजारियों के कुर्तों में जेब नहीं होनी चाहिए और मंदिर में आने-जाने वालों की जांच के लिए मेटल डिटेक्टर लगाए जाने चाहिए।
इस बयान का अखिल भारतीय पुजारी महासंघ और महाकाल सेना ने विरोध किया। उनका कहना था कि इस तरह का बयान पुजारियों की छवि खराब करता है और उनका अपमान है।
विरोध अभी खत्म नहीं
हालांकि महामंडलेश्वर ने माफी मांग ली है, लेकिन महाकाल सेना और अखिल भारतीय पुजारी महासंघ का कहना है कि पुजारियों पर की गई टिप्पणी को लेकर उनका विरोध अभी जारी रहेगा।
महंत रवींद्र पुरी महाराज ने भी कही ये बात
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज ने भी महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद के साथ मंदिरों की व्यवस्था को लेकर सुझाव दिए थे। उन्होंने कहा था कि बड़े मंदिरों में पुजारियों और कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली ड्रेस, ड्रेस कोड और मेटल डिटेक्टर जैसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
महंत रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश की जाती है। इसलिए मंदिरों में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे किसी तरह के विवाद की गुंजाइश न रहे।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में यह व्यवस्था लागू की गई है कि किसी भी पुजारी की यूनिफॉर्म में जेब नहीं होगी। मंदिरों में पूजा के दौरान धोती-कुर्ता पहना जाता है, लेकिन अब कुर्ते में जेब नहीं रखी जाती।
उन्होंने कहा कि कई बार श्रद्धालु सीधे पुजारी की जेब में पैसे रख देते हैं। बाद में उसकी तस्वीर या वीडियो सामने आने पर गलत संदेश जाता है। अगर जेब ही नहीं होगी तो श्रद्धालु दान सीधे दानपेटी में डालेंगे और विवाद भी नहीं होगा।