रतलाम। रेलवे मिशन रफ्तार के तहत दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 160 किमी प्रति घंटे तक करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए रतलाम रेल मंडल में ट्रेनों की सुरक्षा के लिए ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) सिस्टम ‘कवच’ लगाया जा रहा है। रतलाम के लोकोमोटिव केयर सेंटर यानी डीजल लोको शेड में इंजनों को ‘कवच’ सिस्टम से अपग्रेड किया जा रहा है।
रतलाम रेल मंडल के 96 इंजनों में यह सिस्टम लगाया जाना है। इनमें से 68 इंजनों में काम पूरा हो चुका है। बाकी इंजनों में भी काम किया जा रहा है। ‘कवच’ सिस्टम खराब मौसम, फॉग और दूसरी स्थिति में ट्रेनों के सुरक्षित संचालन में मदद करेगा। यह लोको पायलट को भी कई तरह से सहायता देगा।
पैसेंजर और गुड्स ट्रेनों के इंजनों में लगा कवच
अब तक पैसेंजर ट्रेनों के 7 और गुड्स ट्रेनों के 61 इंजनों में ‘कवच’ सिस्टम अपडेट हो चुका है। रेल अधिकारियों के अनुसार, अगर लोको पायलट से किसी कारण से गलती हो जाए, ब्रेक लगाने में चूक हो या सिग्नल दिखाई न दे और लाल सिग्नल पार होने की स्थिति बने, तो सिस्टम अपने आप ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोकने में मदद करेगा। यह सिस्टम ट्रेन की टक्कर रोकने, तेज गति को नियंत्रित करने और सिग्नल की जानकारी समय पर देने में भी मदद करेगा।
224 किमी रेल सेक्शन में कवच सिस्टम एक्टिव
रतलाम रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार पांडेय ने बताया कि नागदा से गोधरा सेक्शन के 224 रूट किलोमीटर में कवच सिस्टम एक्टिव किया गया है। इसमें 154 किमी रतलाम रेल मंडल और 70 किमी वडोदरा रेल मंडल में है। उन्होंने बताया कि नागदा से गोधरा के बीच कवच का काम पहले ही पूरा हो चुका है। रतलाम-चंदेरिया सेक्शन में 40 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। उज्जैन-इंदौर सेक्शन में काम स्वीकृत हो चुका है। रतलाम रेल मंडल के कुछ अन्य सेक्शन में काम पूरा हो गया है, जबकि कुछ जगह काम चल रहा है। इसे जल्द पूरा करने की तैयारी है।