भोपाल। मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत पात्र परिवारों को मुफ्त रजिस्ट्री देने के लिए राज्य सरकार ने नया आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक, धनतेरस के मौके पर मंत्री, सांसद और विधायक अपने पैतृक या पसंद के किसी एक गांव में पहुंचेंगे। वहां उनकी मौजूदगी में पात्र परिवारों की संपत्तियों की रजिस्ट्री कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद राजस्व विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों को इसकी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का लक्ष्य चयनित गांव में एक दिन के भीतर 100 प्रतिशत रजिस्ट्री का काम पूरा कराना है।
धनतेरस पर जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में होगी रजिस्ट्री
राजस्व विभाग ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 के क्रियान्वयन को लेकर कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि आगामी धनतेरस पर प्रदेश के मंत्री, सांसद और विधायक अपने पैतृक गांव या अपनी पसंद के किसी एक गांव में पहुंचेंगे।
जनप्रतिनिधि वहां पात्र परिवारों की संपत्ति की रजिस्ट्री का काम अपनी मौजूदगी में पूरा कराएंगे। इसके लिए चयनित गांव में पात्र परिवारों की 100 प्रतिशत रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा गया है।
कलेक्टरों को जनप्रतिनिधियों से समन्वय करने के निर्देश
राजस्व विभाग की ओर से सोमवार को जारी आदेश के अनुसार, सभी जिलों के कलेक्टर संबंधित मंत्री, सांसद और विधायकों से तत्काल समन्वय करेंगे। उनके पैतृक या इच्छित गांव का चयन कर वहां एक दिन में पूरे आबादी गांव की रजिस्ट्री कराने की व्यवस्था की जाएगी।
शासन ने इस अभियान को प्राथमिकता का विषय बताया है। कलेक्टरों को समय-सीमा में सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्व अधिकारियों और पटवारियों की लगाई जाएगी ड्यूटी
आदेश के पालन के लिए प्रदेश के सभी राजस्व अनुविभागीय अधिकारियों, तहसीलदारों और पटवारियों को धनतेरस के मौके पर लगातार ड्यूटी में रहने के लिए कहा गया है। चयनित गांवों में रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए राजस्व अमले को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही कलेक्टरों को चयनित गांवों की सूची, हितग्राहियों की संख्या और कार्ययोजना के साथ प्रगति प्रतिवेदन शासन को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
रजिस्ट्री के बाद अभिलेख वितरण के निर्देश अलग से आएंगे
राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना के तहत जो भी रजिस्ट्री होगी, उनके पंजीकृत अभिलेखों के वितरण को लेकर अलग से दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। फिलहाल कलेक्टरों को जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में रजिस्ट्री कराने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।