सरवानिया महाराज। नीमच-सिंगोली सड़क निर्माण परियोजना की धीमी गति और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। करीब 300 करोड़ रुपये की लागत वाली इस सड़क परियोजना का काम निर्धारित समय-सीमा नजदीक आने के बावजूद अधूरा पड़ा है। सड़क निर्माण के साथ नालों का काम भी पूरी गति से नहीं हो पा रहा है। ऐसे में मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों और सड़क किनारे रहने वाले लोगों को धूल, उखड़ी सड़क और आवागमन की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से सड़क निर्माण की उम्मीद लगाए बैठे रहवासियों को अब तक राहत नहीं मिली है। सड़क की खराब स्थिति के कारण दिनभर धूल के गुबार उड़ते हैं। इसका असर दुकानदारों और आसपास रहने वाले परिवारों की दिनचर्या पर भी पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि दुकानों और घरों में लगातार धूल जमा होने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
नाला निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, लीकेज की शिकायत-
अक्टूबर माह के अंतिम दिनों में सड़क किनारे नाला निर्माण का काम शुरू होने से रहवासियों को राहत की उम्मीद जगी थी। लेकिन निर्माणाधीन नाले में पानी के लीकेज की शिकायत सामने आने के बाद इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस पार्षद विक्रम धनगर ने आरोप लगाया कि नाले में अभी से पानी का रिसाव हो रहा है। यदि निर्माण की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में नाले का गंदा पानी आसपास के घरों में पहुंचने की आशंका बनी रहेगी।
धनगर ने सड़क निर्माण कंपनी सांवरिया इन्फ्रास्ट्रक्चर कंस्ट्रक्शन कंपनी, उदयपुर के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि निर्माण कार्य की नियमित और प्रभावी निगरानी जरूरी है, ताकि बाद में आमजन को परेशानी न उठानी पड़े।
कलेक्टर ने सड़क की सतह में खामियां देख दिए सुधार के निर्देश-
जानकारी के अनुसार, सेमली चंद्रावत और नेवड़-निपानिया क्षेत्र में सड़क की ऊपरी सतह के समतल नहीं होने की शिकायतों के बाद जिला कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने मौके पर निरीक्षण के दौरान खामियों को देखा और निर्माण कंपनी को आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए। इससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता और संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा तेज हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एमपीआरडीसी की निगरानी में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जानी चाहिए। उनका आरोप है कि काम में देरी और निगरानी की कमी के कारण परियोजना का लाभ समय पर आमजन तक नहीं पहुंच पा रहा है।
सरवानिया में सड़क के सेंटर से 8-8 मीटर का दायरा तय-
जानकारी के मुताबिक, एमपीआरडीसी ने सरवानिया महाराज में सड़क के सेंटर से दोनों ओर 8-8 मीटर का दायरा तय कर नाला निर्माण कराने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि शुरुआत में यह दूरी 10-10 मीटर निर्धारित की गई थी, लेकिन सड़क किनारे पहले से बने मकानों और दुकानों को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद इसे घटाकर 8-8 मीटर किया गया।
इस माप को तय करने में हुई देरी के कारण नाला निर्माण का काम प्रभावित हुआ। अब मैपिंग पूरी होने के बाद काम आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, स्थानीय लोगों के मन में यह सवाल भी है कि तय किए गए दायरे के कारण सड़क किनारे स्थित किन मकानों और दुकानों पर असर पड़ेगा।
धूल और जर्जर सड़क से दुकानदारों में नाराजगी-
सड़क किनारे व्यापार करने वाले दुकानदारों और रहवासियों का कहना है कि धूल के गुबार के कारण उन्हें दिनभर दुकानों और घरों की सफाई करनी पड़ती है। कई वर्षों से नई सड़क बनने की उम्मीद लगाए लोगों को अब तक राहत नहीं मिली है। लोगों ने निर्माण कार्य में तेजी लाने और गुणवत्ता की नियमित जांच कराने की मांग की है।
इस संबंध में एमपीआरडीसी के एजीएम राहुल बरड़े से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
दीपावली के बाद काम में तेजी लाने का दावा-
निर्माण कंपनी सांवरिया इन्फ्रास्ट्रक्चर कंस्ट्रक्शन कंपनी, उदयपुर के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर विक्रम सिंह ने बताया कि नाला निर्माण में पानी के लीकेज और गुणवत्ता संबंधी शिकायतों को दिखवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरवानिया में प्रशासन और एमपीआरडीसी की निगरानी में सड़क के सेंटर से 8-8 मीटर का दायरा तय कर लिया गया है। पहले माप तय करने में देरी के कारण काम प्रभावित हुआ था, लेकिन अब मैपिंग पूरी हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि दीपावली के बाद निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी। नाला निर्माण के दौरान आम रास्तों, गलियों और खेतों की ओर जाने वाले रास्तों का स्तर सीसी सड़क के बराबर रखने का प्रयास किया जाएगा।