चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में धर्म सभा को संबोधित करते हुए अभिनव मुनि ने कहा कि समय को लौटा कर नहीं लाया जा सकता है। काल का पता नहीं, कब चल जाए। समय को जो सार्थक करता है उसी के लिए रास्ते खुलते हैं।
पूछिसूणम के माध्यम से भगवान महावीर के गुणो का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान स्वर्ण के समान थे। उनके समोशरण में जाने वाला आनंद पता है। भगवान ने चार बातों का चिंतन किया कि मेरा कहीं भी जन्म मरण हो सकता है, कभी भी राग आ सकता है और कभी भी वृद्धावस्था आ सकती है।
भगवान ने शरीर के प्रति आसक्ति भाव समाप्त किया। आग्रह भव भ्रमण कराने वाला होता है। हमें आग्रहमुक्त बनना है। किसी के प्रति राग भड़काने वाला होता है। किसी भी व्यक्ति की जरूरत कभी भी पड़ सकती है। आकर्षण को समाप्त करना है। कर्तव्य भाव के साथ जीना है। स्वयं के पुरुषार्थ से रहने वाला कभी भी परेशान नहीं हो सकता।
इससे पूर्व धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिव्यम मुनि ने कहा कि जीवन में प्रतिकार तथा प्रतिशोध से बचें। हमें अपने पुण्य पर विश्वास करना है परंतु पुरुषार्थी भी बनना होगा। भगवान महावीर स्वामी की साधना के दो उद्देश्य थे उपयोग विवेक से और सहयोग सबको। निष्पक्षता ही जीवन में स्पष्टता लाती है। तारीका जीवन में सलीका लाता है। बिना तरीके के साधना नहीं होती। बिना साधना के शांति नहीं मिलती, बिना शांति के शुद्धि नहीं मिलती और बिना शुद्धि के सिद्धि नहीं मिलती। बिखरा हुआ समाज और बिखरा हुआ परिवार कभी भी बादशाह नहीं बन सकता। हम आपस में लड़ झगड़ कर दूसरों को बादशाह बनने का अवसर देते हैं।
धर्मसभा में कई श्रावक श्रविका मौजूद थे। अंत में मुनिश्री ने प्रत्याख्यान करवा मंगल पाठ सुनाया। धर्म सभा का संचालन पारसमल सोनी ने किया।