आगर मालवा। आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में स्थित विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में नवरात्रि में आस्था का जनसैलाब उमड़ता है। मां बगलामुखी तंत्र साधना के लिए जानी जाती है। नवरात्रि में बड़े-बड़े साधक यहां साधना करने पहुंचते है। मां बगलामुखी तीन मुखों में विराजमान है। इन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है।
सत्ता की देवी मानी जाती हैं मां बगलामुखी
नवरात्रि में अक्सर देखा जाता है कि यहां राजनेताओं का जमावड़ा काफी रहता है। वह इसलिए क्योंकि यह आस्था का केंद्र है और मां बगलामुखी सत्ता की देवी हैं। राजजीति से जुड़े लोगों का वेसे तो यहां साल भर आना-जाना रहता है। लेकिन जब चुनाव करीब होते हैं तो यह माहौल राजनीतिक ज्यादा हो जाता है और यहां लगातार नेताओं का आगमन होने लगता हैं। लोकसभा व विधानसभा चुनावों में राजनीतिक से जुड़े लोगों का जमावड़ा लगा रहता है।
दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
नवरात्रि में बाहर से आने वाले श्रद्धालु लगातार नौ दिन जाप करते हैं। ऐसा बताया जाता है कि जो भी श्रद्धालु यहां आते हैं, उनकी मनोकामना मां पूरी करती हैं। यहां विशेष अनुष्ठान भी किए जाते हैं। शत्रु का विनाश करने वाली और मनोकामना पूरी करने वाली मां पीतांबरा नवरात्रि में सबको अपना आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
1935 में हुई थी पीतांबरा पीठ की स्थापना
पीतांबरा पीठ एक प्राचीन और सिद्ध शक्तिपीठ है, जिसकी स्थापना 1935 में परम कल्याण स्वरूप अनंत श्री विभूषित स्वामीजी महाराज ने की थी। यह पवित्र स्थल मां बगलामुखी और मां धूमावती को समर्पित है, जो तंत्र-मंत्र और गुप्त पूजा-अर्चना के लिए विख्यात हैं। मां पीतांबरा को राजसत्ता की देवी माना जाता है, और यहां भक्त राजनीतिक विजय, शत्रुओं पर जीत और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं।
शारदीय नवरात्रि को देखते हुए मंदिर में विशेष व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से करीब 500 पुलिसकर्मियों को लगाया है। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। बड़े-बड़े पार्किंग स्थल बनाए गए है, ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।