नीमच। करीब 40 वर्षों से अधिक समय तक अदालतों और विभिन्न अधिकृत मंचों पर कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI), नयागांव के मजदूरों को बकाया वेतन की राशि मिलने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। औद्योगिक न्यायालय, श्रम न्यायालय, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में विभिन्न चरणों में कानूनी लड़ाई जीतने के बाद अब CCI प्रबंधन ने जावद तहसीलदार न्यायालय को पत्र देकर भुगतान संबंधी आदेश का पालन करने की सहमति जताई है। इस घटनाक्रम से मजदूरों में हर्ष का माहौल है।
इस संबंध में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के प्रदेश सचिव शैलेंद्र सिंह ठाकुर, सीटू के जिला कार्यकारी अध्यक्ष किशोर जवेरिया, सीमेंट मजदूर श्रमिक संघ के निर्भयराम चौहान, इंटक के जिला अध्यक्ष भगत वर्मा और संयुक्त ट्रेड यूनियन के शोभाराम धाकड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि CCI में कार्यरत विभिन्न श्रेणियों के लोडर एवं अन्य संबंधित मजदूरों के बकाया वेतन भुगतान का मामला अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है।
प्रबंधन ने तहसीलदार न्यायालय को दिया पत्र-
जानकारी के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 को CCI नयागांव के कार्यकारी प्रभारी (एग्जीक्यूटिव इंचार्ज) परशुराम डी. ने जावद तहसीलदार कार्यालय को पत्र दिया। पत्र में उल्लेख किया गया है कि तहसीलदार कार्यालय से 17.56 करोड़ रुपये के भुगतान के संबंध में मांग नोटिस प्राप्त हुआ है। प्रबंधन ने आदेश का पालन करने और संबंधित मजदूरों का विवरण पता कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने पर सहमति जताई है। पत्र के साथ मांग नोटिस की प्रति भी संदर्भ के लिए संलग्न की गई है।
55 मजदूरों को मिल सकती है बड़ी राहत-
ट्रेड यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार, इस मामले में 55 मजदूरों को बकाया राशि का भुगतान किया जाना है। प्रत्येक मजदूर को लगभग 31 लाख 92 हजार रुपये मिलने का अनुमान है। भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने में एक से दो माह का समय लग सकता है। हालांकि, इससे पहले CCI प्रबंधन को जावद तहसीलदार न्यायालय में संबंधित राशि का चेक जमा करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट तक चली कानूनी लड़ाई-
ट्रेड यूनियन पदाधिकारियों ने बताया कि बकाया वेतन का मामला कई दशकों से लंबित था। प्रबंधन ने उच्च न्यायालय में हार के बाद उच्चतम न्यायालय का भी रुख किया था, लेकिन वहां उसकी याचिकाएं खारिज हो गई थीं। इसके बाद अब प्रबंधन की ओर से भुगतान संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए पत्र दिया गया है।
लंबे समय से अपने हक की राशि का इंतजार कर रहे मजदूरों के लिए यह घटनाक्रम बड़ी राहत माना जा रहा है। ट्रेड यूनियन पदाधिकारियों ने इसे मजदूरों के लंबे संघर्ष और कानूनी लड़ाई की जीत बताते हुए कहा कि यह मामला संदेश देता है कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखा जाए तो न्याय मिलने की उम्मीद बनी रहती है।