बेहरावल। नवरात्रि का पर्व भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन बेहरावल गांव में मां अम्बे की आराधना का उत्साह अब भी चरम पर है। यहां गुरुवार से पांच दिवसीय गरबा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। गुजरात के प्रसिद्ध शक्तिपीठ पावागढ़ से लाई गई मां अम्बे की ज्योत के साथ शुरू हुए इस महोत्सव में भक्ति, आस्था और गुजराती संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिल रही है।
बेहरावल की बड़ीसेरी स्थित मां अम्बे मंदिर में शरद पूर्णिमा तक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की धूम रहेगी। प्रतिदिन मां की ज्योत प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना और आरती की जाएगी। इसके साथ ही गुजराती भजनों की धुन पर श्रद्धालु गरबा कर मां की आराधना करेंगे। इस आयोजन से पूरे गांव का माहौल भक्तिमय हो गया है।
1847 से निभाई जा रही परंपरा
ग्रामीण बुजुर्गों के अनुसार, बेहरावल में इस अनूठी परंपरा की शुरुआत वर्ष 1847 में हुई थी। नांदोड़ा सेन परिवार के सदस्यों ने गुजरात के प्रसिद्ध शक्तिपीठ पावागढ़ से मां अम्बे की ज्योत लाकर बेहरावल में स्थापित की थी। तभी से मां की सेवा और आराधना का क्रम निरंतर जारी है।
पावागढ़ में विराजित मां अम्बे के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। भक्त उन्हें प्रेमपूर्वक पावागढ़ मैया के नाम से पुकारते हैं।
दशहरे के बाद भी जारी रहती है गरबा की रौनक
दशहरे के दूसरे दिन से शरद पूर्णिमा तक चलने वाला यह पांच दिवसीय गरबा महोत्सव अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बेहरावल गांव की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में ग्रामीण पूरे उत्साह से शामिल होते हैं।
मां अम्बे की ज्योत, गुजराती भजनों और गरबा की थाप के बीच बेहरावल में आस्था और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। नवरात्र के बाद भी जारी यह उत्सव मां के प्रति ग्रामीणों की अटूट श्रद्धा और परंपरा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।