चित्तौड़गढ़। “हर बालक में कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है। आवश्यकता है उसकी प्रतिभा को समझने, उसे उचित अवसर देने और निखारने की।” यह विचार जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने बुधवार को बाल अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित बाल गृह में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।
जिला कलक्टर ने बाल गृह के बालकों से संवाद कर उनकी दिनचर्या, गृह में उपलब्ध सुविधाओं, विद्यालय में कराई जा रही पढ़ाई तथा स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने बच्चों से बातचीत कर उनकी रुचियों, आवश्यकताओं और गतिविधियों के बारे में भी जाना।
इस दौरान जिला कलक्टर ने बच्चों द्वारा तैयार की गई पेंटिंग और क्राफ्ट सामग्री का अवलोकन किया तथा उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों की रुचि और क्षमता के अनुरूप उन्हें राजस्थान आजीविका कौशल मिशन निगम के माध्यम से आवश्यक कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से बच्चों को आत्मनिर्भर बनने और भविष्य में अपनी आजीविका संचालित करने में मदद मिलेगी, ताकि बाल गृह से बाहर जाने के बाद वे सम्मानपूर्वक अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
जिला कलक्टर ने बालकों को उपहार भी प्रदान किए। साथ ही बाल गृह के संचालकों को निर्देशित किया कि बाल देखरेख संस्थाओं में रह रहे बच्चों की आवश्यकताओं और सुविधाओं से संबंधित कोई भी समस्या होने पर उन्हें तत्काल अवगत कराया जाए, ताकि समय पर उसका समाधान किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक ओमप्रकाश तोषनीवाल ने जिला कलक्टर को बाल गृह में संचालित गतिविधियों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी दी।
इस अवसर पर अतिरिक्त जिला कलक्टर (भू-अभिलेख) राजलक्ष्मी गहलोत, चाइल्ड हेल्पलाइन समन्वयक नवीन काकड़दा, संस्था अध्यक्ष शंकर लाल रावल, सचिव शायर सुहालका, परिवीक्षा अधिकारी धर्मचंद, विनोद मीणा सहित संबंधित कार्मिक उपस्थित रहे।