नीमच। महामहिम राज्यपाल मंगू भाई पटेल को मध्यप्रदेश में जनपद सदस्यों के अधिकार बढ़ाने एवं सुविधा व्यवस्था में बदलाव हेतु जनपद पंचायत अध्यक्ष शारदा धनगर ने ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मांग की गई कि त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के तहत जनपद सदस्यों का निर्वाचन होता है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में जनपद सदस्यों को जनहित के कार्यों के लिए कोई अधिकार नहीं दिए गए हैं। क्षेत्र की व्यापकता को देखते हुए जनपद सदस्याें केअधिकार एवं सुविधा व्यवस्था बढ़ाई जाए, ताकि बेहतर काम हो सकें।
ज्ञापन में 08 सूत्रीय मांगे निम्नानुसार निवेदन पेश है-
1- यह कि जनपद सदस्य दो से तीन ग्रामपंचायत क्षेत्रों से निर्वाचित होकर आते हैं। पांच हजार से दस हजार की आबादी वाले क्षेत्र से निर्वाचन के बावजूद जनपद सदस्यों को पर्याप्त अधिकार नहीं दिए गए हैं। इस कारण जनपद सदस्यों को धरातल पर काम करने में काफी परेशानी आती है। यहां तक कि अनेक कार्यों के अवसर पर उपेक्षित भी होना पड़ता है। इस कारण जनपद सदस्यों को उनके निवास क्षेत्र की ग्राम पंचायत में बैठक के लिए कक्ष एवं फर्नीचर की व्यवस्था होनी चाहिये। जनपद के वार्ड की सभी पंचायत मुख्यालयों पर संबंधित जनपद सदस्य का नाम और मोबाइल नंबर अंकित कराया जाना चाहिए।
2- यह कि प्रोटोकॉल के तहत जनपद सदस्य त्रि स्तरीय पंचायतों में उनके अपने-अपने वार्ड के कार्यक्रमों, ग्राम सभा, साधारण सभा, शासन के कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया जाना चाहिये। लोकार्पण एवं भूमि पूजन के शिलालेख पर अनिवार्य रूप से जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य एवं जनपद अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष का नाम वरीयता क्रम में अंकित कराया जाना चाहिए।
3- यह कि जनपद सदस्य दो से तीन या चार ग्राम पंचायत क्षेत्र से निर्वाचित होकर आते हैं। इतना व्यापक क्षेत्र होने के बावजूद जनपद सदस्यों का मानदेय केवल 1500 रुपये निर्धारित किया हुआ है। क्षेत्र की व्यापकता के लिहाज से जनपद सदस्यों का मानदेय 12,000 रुपये किया जाए।
4- यह कि राज्य वित्त आयोग की (14 वें वित्त, 15 वें वित्त, 5 वें वित्त, खनिज मद आदि) राशियों, सहित ग्राम पंचायतों में सभी प्रकार के कार्य स्वीकृति के दौरान संबंधित वार्ड के जनपद सदस्य का अनुमोदन अनिवार्य किया जाए। इसके अलावा जनपद सदस्य विकास निधी 50 लाख रुपये निर्धारित की जाए।
5- यह कि शासन की योजनाओं का लाभ लेने केलिए ग्राम पंचायतों के माध्यम से जनपद पंचायत द्वारा ग्राहाय किए जाने वाले आवेदनों में संबंधित ग्राम पंचायत के साथ ही जनपद सदस्यों का प्रमाणीकरण अथवा अनुमोदन अनिवार्य किया जाए। इस व्यवस्था से हितग्राही मूलक योजनाओं में भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा और हितग्राही के कार्य में विलम्ब होने पर निगरानी भी हो सकेगी।
6- यह कि जनपद स्तरीय अधिकारी, कर्मचारियों की सीआर लिखने का अधिकार जनपद पंचायत के निर्वाचित बोर्ड को दिया जाए। इससे कर्मचारियों के टालमटोल वाले रवैये में बदलाव होगा।
7- जनपद सदस्य के लेटर पैड पर खेत, सडक़, सीसी रोड, सामुदायिक भवन, विद्यालय भवन, आंगनवाडी भवन, तालाब, डेम आदि की स्वीकृति प्रदान की जाना भी तय किया जाए।
08- जनपद सदस्यों के मार्गदर्शन में 1 महीने के अंदर अपने जनपद बोर्ड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में जन समस्या निवारण शिविर का आयोजन किया जाए।
निवेदन है कि पंचायत राज व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए मांगों का गंभीरता से ले और समस्याओं का निराकरण करें। अन्यथा, सभी जनपद सदस्य गांधीवादी तरीके से आंदोलन करने को विवश होंगे।
ज्ञापन के दौरान शारदा बाई धनगर, कांताबाई हरीश अहीर, सुनीता लबाना, प्रहलाद भट्ट, रतनलाल मलावत, वासुदेव मेघवाल, समरथ कुमावत, नागुलाल मालवीय, सदु बाई मांगीलाल भील, गजा बाई प्रहलाद सिंह चौहान उपस्थित रहे।