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September 19, 2023, 12:19 pm
BIG NEWS : नीमच के पेयजल संकट पर नीमच नगरपालिका श्वेतपत्र जारी करे- पूर्व विधायक डॉ जाजू, पढ़े मुकेश पार्टनर की खबर 

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नीमच। पूर्व विधायक डाक्टर सम्पत स्वरूप जाजू ने एक बयान में कहा कि जाजूसागर बांध में बांध के केचमेंट क्षेत्र में अल्पवर्षा के कारण पानी की आवाक नहीं हुई हैं साथ में जिस तरह से पेयजल व्यवस्था का कुप्रबंधन नगरपालिका द्वारा विगत कई वर्षों किया जा रहा है उसके खामियाँजा स्वरूप नीमच शहर को आने वाले समय में पानी के लिये तरसना पड़ेगा। 
डाक्टर जाजू ने कहा कि नीमच की पेयजल समस्या कुप्रबंधन का जीता जागता उदाहरण हैं। नीमच की पेयजल योजनाओं को भ्रष्टाचार निगल गया जिसका ख़ामियाज़ा शहर भुगत रहा हैं। नीमच शहर की पेयजल समस्या का निराकरण करने और शहर को नियमित सुचारू रूप से पेयजल उपलब्ध हो के लिये लिये विगत बीस वर्षों में अरबों रुपये स्वीकृत हुए उसके बाद भी पेयजल संकट ज्यों का त्यों हैं। आम आदमी पानी के लिये तरस रहा हैं। 
डाक्टर जाजू ने पूछा कि अरबों रुपया भ्रष्टाचार के भेट चढ़ा हैं, कौन ज़िम्मेदार हैं?  नीमच शहर की जल समस्या पर नीमच नगरपालिका को श्वेतपत्र जारी कर बताना चाहिये कि विगत बीस वर्षों में कब-कब (कौनसे साल के बजट में ) किस-किस मद में और केंद्र और राज्य सरकार की किस-किस योजना के तहत धन आवंटित हुआ और उस योजना का धरातल पर कितना क्रियान्वयन हुआ और उसके क्या परिणाम मिले  हैं। इसके अतिरिक्त नीमच नगरपालिका ने स्वयं के बजट में विगत बीस वर्षों में पेयजल के लिये कितनी धन राशि स्वीकृत की और उसके क्या परिणाम मिले।
नीमच शहर की पेयजल समस्या का निराकरण करने और शहर को नियमित सुचारू रूप से पेयजल उपलब्ध हो के लिये विगत बीस वर्षों में अरबों रुपये स्वीकृत हुए उसके बाद भी पेयजल संकट ज्यों का त्यों हैं। ज़िम्मेदार बतायेंगे कि अरबों रुपये खर्ब करने के बाद भी शहर का आम आदमी पानी के लिये क्यों तरस रहा हैं?
डाक्टर जाजू ने बीसवीं सदी के नीमच की पेयजल व्यवस्था और इक्कीसवीं सदी के नीमच की पेयजल व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि बीसवीं सदी (सन् 1947 से 2000) और इक्कीसवी सदी (सन् 2001 से 2023) तक नीमच शहर की पेयजल व्यवस्था का तुलनात्मक अध्ययन करे तो बीसवीं सदी के राजनैतिक नेतृत्व और इक्कीसवीं सदी के राजनीतिक नेतृत्व की कार्यशैली, सोच और लीक से हटकर दृढ़ इच्छा शक्ति से कार्यों को धरातल पर समयसीमा से पूर्व क्रियान्वयन करने का अंतर स्पष्ट नज़र आता हैं। बीसवीं सदी के राजनीतिक नेतृत्व में शहर की पेयजल समस्या को निपटाने के लिये दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ एक जज्बा था जिसको उन्होंने अपना कर्तव्य मान कर पूरा किया। बीसवीं सदी में केंद्र और राज्य सरकारों की पेयजल की बहुत ही सीमित योजनाये थी और नीमच जैसा छोटा शहर पात्रता में भी दूर-दूर तक नहीं आता था। बीसवीं सदी में पेयजल के लिये धनराशि का अभाव था। 
जबकि इक्कीसवीं सदी (2000 से 2023) में बीसवीं सदी के विपरीत पेयजल की योजनायें बहुत हैं और नीमच शहर पात्र भी हैं धन की कोई कमी नहीं हैं।
लेकिन इक्कीसवीं सदी के राजनीतिक नेतृत्व की तथाकथित नेतृत्वशैली और दूरदृष्टि का अभाव एवं प्रशासन पर नियंत्रण नहीं होने का ख़ामियाज़ा नीमच शहर भुगत रहा हैं और आज नीमच शहर में आगामी समय में पानी का संकट होगा स्पष्ट दिख रहा है। 

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