शहडोल। मध्यप्रदेश में दगना कुप्रथा अब तेजी से पैर पसार रही है। सबसे ज्यादा मामले शहडोल जिले से सामने आए हैं। बीते 20 दिनों की बात करें तो 5 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें 4 मासूमों की मौत हो गई है। वहीं एक बच्चे का इलाज गंभीर हालत में मेडिकल कालेज शहडोल में चल रहा है।
कुप्रथा, कुरीति और अंधविश्वास के चलते मासूम बच्चों को असहनीय पीड़ा सहनी पड़ रह है। गर्म सलाखांे, गर्म चूड़ियां और जलती अगरबत्ती से इलाज के नाम पर बच्चों से क्रूरता की जा रही है। इतना ही नहीं बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो जाते है और इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं।
ताजा मामला शहडोल के लालपुर गांव से सामने आया है। जहां दो माह के मासूम बच्चे को सर्दी खांसी होने पर नानी ने अगरबत्ती को दाग दिया, जिसके बाद बच्चे की हालत बिगड़ गई और उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां बच्चे की हालत नाजुक बनी हुई है। दो माह की मासूम महक को सर्दी-खांसी की शिकायत थी। बच्चे की मां इंद्रवती कोल ने नानी मुन्नी बाई कोल से दगवाया है।
बता दें कि दो माह की महक कोल को उसकी नानी ने जलती अगरबत्ती से दाग दिया। इलाज के नाम पर अंधविश्वास का खेल मासूमांे की जान ले रहा है। महक को गंभीर हालत में मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया है। जहां उसे ऑक्सीजन के सपोर्ट पर रखा गया है। डॉक्टरों के मुताबिक बच्चे की हालत नाजुक बनी हुई है।
केस 1- कठौतिया गांव में 2 बच्चों की मौत, दाई ने गर्म चूड़ियों से बच्चों को दागा था।
केस 2- हरदी गांव में डेढ़ साल की मासूम को गर्म सलाखांे से 51 बार दागा गया। इलाज के दौरान बच्चे ने दम तोड़ दिया।
केस 3- मैकी गांव में 3 माह के मासूम को गर्म लोहे से 21 बार दागा गया। उपचार के दौरान बच्ची की मौत हो गई।
केस 4- जिला मुख्यालय से सटे बंधवा गांव में डेढ़ माह के बच्चे को दाई ने गर्म चूड़ियों से दागा। बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई।
केस 5- पुष्पराजगढ़ के ताराडांड गांव में 3 माह की बच्ची को 51 बार दागा गया। अंधविश्वास के चलते इस बच्ची ने भी दम तोड़ दिया।
केस 6- ताजा मामला सोहागपुर ब्लाक के लालपुर गांव का है जहां दो माह की महक को उसी की नानी ने जलती अगरबत्ती से दाग दिया। बच्ची को गंभीर हालत में मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया है जहां उसका इलाज चल रहा है।
कुप्रथा का मामला उजागर होने पर पुलिस ने दागने वाली दाई के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार भी कर लिया है। स्वास्थ्य विभाग ने मैदानी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें भी संस्पेंड किया है। लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। कहीं न कहीं शिक्षा और जागरूकता का अभाव है और ऐसी कुरीति पर अंकुश लगाने के लिए एक कठोर कानून बनाने की जरूरत है।
लालपुर गांव में महक को दागने का मामला जैसे से ही सामने आया तो कलेक्टर वंदना वैद्य ने गांव पहुंचकर लोगों को इस कुरीति के प्रति जागरूक किया। बच्चे के परिजनों से मुलाकात की और ऐसा कभी नहीं करने की सलाह दी। बुढ़ार पुलिस ने बच्चे की नानी के खिलाफ धारा 224 के अलावा ड्रग मैजिक अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है।