नीमच। शहर में पिछले कई दिनों से मेंटेनेंस के नाम पर की जा रही बिजली कटौती के बाद भी बारिश शुरू होते ही विद्युत व्यवस्था चरमरा गई है। दिन हो या रात, बिना किसी पूर्व सूचना के बार-बार बिजली गुल होने से आमजन, व्यापारी, किसान और विद्यार्थी भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि विभाग द्वारा लंबे समय तक मेंटेनेंस के दावे किए गए, लेकिन पहली ही बारिश में व्यवस्थाओं की पोल खुल गई।
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कई-कई घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से पेयजल संकट भी गहरा गया है। अधिकांश घरों में मोटर से पानी भरने की व्यवस्था होने के कारण बिजली नहीं रहने पर लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। स्कूल खुलने के बाद बच्चों की पढ़ाई और सुबह की दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है।
व्यापारियों का छलका दर्द-
स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि बिना बारिश के भी कई बार अचानक बिजली बंद कर दी जाती है। कपड़ा व्यापार से जुड़े दुकानदारों का कहना है कि लगातार बिजली कटौती से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। कई बार बिजली सुधार के नाम पर केवल अस्थायी मरम्मत की जाती है, जिसके कारण तारों से चिंगारियां निकलती रहती हैं और दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
व्यापारियों का कहना है कि विभाग पहले दो-तीन घंटे की कटौती की सूचना देता है, लेकिन कई बार बिजली छह से आठ घंटे तक बंद रहती है। इससे छोटे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
आमजन बोले- मेंटेनेंस के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
रहवासियों का कहना है कि गर्मी के पूरे मौसम में मेंटेनेंस के नाम पर लगातार बिजली काटी गई। उम्मीद थी कि बारिश के दौरान बिजली व्यवस्था बेहतर रहेगी, लेकिन अब हालात पहले से भी अधिक खराब हो गए हैं। रात में घंटों बिजली नहीं रहने से बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों पर भी पड़ रहा असर-
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बार-बार बिजली गुल होने से किसान प्रभावित हो रहे हैं। बुवाई के समय सिंचाई के लिए मोटर चलाने में परेशानी आ रही है। किसानों का कहना है कि अनियमित बिजली आपूर्ति से कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
मीटर बिल और अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल-
कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि बिजली बिलों में मीटर खराब होने के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है। शिकायत लेकर विभागीय कार्यालय पहुंचने पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। कई उपभोक्ताओं का यह भी कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों को फोन लगाने पर भी संपर्क नहीं हो पाता।
जनप्रतिनिधियों ने की जांच और सुधार की मांग-
स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मेंटेनेंस कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण हुआ होता तो पहली बारिश में ऐसी स्थिति नहीं बनती। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की जांच कराने और विद्युत व्यवस्था में तत्काल सुधार के निर्देश देने की मांग की है।
जनता की मांग-
शहरवासियों ने मांग की है कि अनावश्यक बिजली कटौती पर रोक लगाई जाए, मेंटेनेंस कार्य की गुणवत्ता की जांच हो, बारिश के मौसम को देखते हुए अतिरिक्त तकनीकी दल तैनात किए जाएं, शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए हेल्पलाइन और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, व्यापारिक क्षेत्रों और अस्पतालों की निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
लगातार हो रही बिजली कटौती ने शहरवासियों की परेशानी बढ़ा दी है। अब लोगों की निगाहें बिजली विभाग और प्रशासन पर हैं कि आखिर कब तक नीमच को इस अघोषित बिजली संकट से राहत मिल पाएगी।