नीमच। रात्रि भोजन से जीवो की हिंसा होती है। इससे हमें सदैव बचना चाहिए ।रात्रि भोज करने से पाप कर्म बढ़ता है पुण्य कर्म घटता है।रात्रि भोज नरक का प्रवेश द्वार होता है। पाप कर्म क्षय के लिए तपस्या सशक्त माध्यम है।
यह बात आचार्य धर्म बोधी सुरी श्री जी महाराज साहब ने कहीं। वे जैन श्वेतांबर श्री भीड़ भंजन पार्श्वनाथ मंदिर श्री संघ ट्रस्ट पुस्तक बाजार के तत्वावधान में पुस्तक बाजार स्थित नवीन आराधना भवन में आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आयम्बिल तप साधना से आत्म कल्याण होता है।
संतो को शुद्ध और पवित्र आहार किस प्रकार से कराते हैं इसका धर्म संस्कार नैतिक ज्ञान भी लोगों को नहीं है इससे साधु संतों के सानिध्य में हमें सीखना चाहिए तभी हमें पुण्य का लाभ मिल सकता है। साधु संतों कोआयम्बिल वृत तप में सूखी रोटी चावल का पानी संतो को आहार करना चाहिए। मोबाइल पाप कर्म का राक्षस होता है इससे सदैव बचना चाहिए। जीवों की रक्षा के लिए जीव दया का पालन करना चाहिए। तपस्या के पुण्य फल से संसार के सारे भौतिक सुख सुविधा का आंनद स्वतरू मिलता है। ग्रामीण क्षेत्र में वातावरण शुद्ध रहता है। पश्चिम शिक्षा के कारण देश के लाखों माता-पिता की हालत खराब है। यदि बच्चों को धार्मिक संस्कारों से जोड़ा जाए तो शिक्षा की सहायक सिद्ध हो सकती है। इस अवसर पर प्रतिदिन धार्मिक ग्रंथों पर आधारित प्रश्न संवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। पूज्य आचार्य भगवंत श्री जिनसुंदर सुरिजी मसा आदि ठाणा 8 का सानिध्य मिला।
आचार्य भगवंत के प्रवचन एवं धर्मसभा हुई। श्री संघ अध्यक्ष अनिल नागौरी सचिव मनीष कोठारी ने बताया कि प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे प्रवचन करने के साध्वी वृंद के दर्शन वंदन का लाभ नीमच नगर वासियों को मिला प्रवचन का धर्म लाभ लिया।