मंदसौर। किसानों की स्थिति को सुधारने और किसानों के विकास को लेकर केन्द्र सरकार कई कदम उठा रही है। इसी के साथ कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में किसानों के लिए एक नई पहल की जानकारी साझा की है। लोकसभा में सांसद सुधीर गुप्ता द्वारा पूछे एक एक प्रश्न के जवाब मंे केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने बताया कि देशभर में किसानों के संकट को मापने के लिए अभी कोई व्यवस्थित “कृषि संकट सूचकांक” (एफडीआई) उपलब्ध नहीं है। हालांकि, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 2020-21 और 2021-22 के दौरान एक पायलट अध्ययन किया गया था, जिसका नाम था- “कृषि संकट और पीएम फसल बीमा योजनाः वर्षा आधारित कृषि का विश्लेषण”।
इस अध्ययन का उदेश्य है कि एक ऐसा टूल तैयार करना, जो किसानों के संकट को पहले ही भांप सके और नीति-निर्माताओं को सही समय पर कदम उठाने में मदद करे। यह सूचकांक जलवायु परिवर्तन, कीमतों में उतार-चढ़ाव और किसानों की कमजोर आर्थिक स्थिति जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखता है। सूचकांक को सात प्रमुख मानकों- जोखिम, अनुकूलन क्षमता, संवेदनशीलता, शमन रणनीतियाँ, ट्रिगर, मनोवैज्ञानिक कारक और प्रभाव- के आधार पर तैयार किया गया है।
तीन महीने पहले मिलेगी चेतावनी
सांसद गुप्ता ने यह भी कहा कि किसानों की आर्थिक समस्याओं को दूर करने मंे किस प्रकार सहायता करेगा, जिसके कारण किसानों को आत्महत्या जैसा कदम भी उठाना पड़ता है। इस पर उन्होने बताया कि एफडीआई का लक्ष्य है कि यह एक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम की तरह काम करे, जो संकट आने से तीन महीने पहले अलर्ट दे सके। यह सूचकांक न सिर्फ संकट की गंभीरता को मापेगा, बल्कि प्रभावित इलाकों की पहचान कर वहां समय पर मदद पहुंचाने में भी सहायक होगा। इसके लिए एक स्केलेबल फ्रेमवर्क भी सुझाया गया है, ताकि सरकारी सहायता सही जगह तक पहुंच सके। हालांकि, यह अभी शुरुआती चरण में है और पूरे देश में लागू करने की कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है।