मंदसौर। डीआईओ दशपुत्र ने बताया कि नए वित्तीय वर्ष से जिले के सभी सरकारी दफ्तर ई-संचालन से जुड़ जाएंगे। इसके लिए विभागों में कर्मचारियों की आईडी बनाने और प्रशिक्षण देने का काम किया जा रहा है। सभी सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों के अलावा लिपिकों की टेबलों पर भी कंप्यूटर और स्केनर लगाए जाएंगे। सभी प्रकार की फाइलें कंप्यूटर के जरिए ही इधर से इधर होंगी। ई-ऑफिस बनने से सरकार द्वारा स्टेशनरी पर जो खर्च किया जाता हैं उसकी बचत होगी।
डीआईओ दशपुत्र ने बताया कि इसके लिए एनआईसी ने एकीकृत लॉगिन प्रणाली परिचय शरू किया है। इससे सभी विभागों को जोड़ा जाएगा। इसमें सभी विभाग प्रमुख के साथ ही सभी एकीकृत लॉगिन प्रणाली से काम शुरू होने के बाद अब जिम्मेदार अपने पास फाइल नहीं रोक सकेंगे। इस सिस्टम में सब कुछ ऑनलाइन होगा। संबंधित कर्मचारी के काम पूरा करने का समय भी तय रहेगा। यदि कोई बिना वजह फाइल रोकता है तो ऑनलाइन ही प्रदर्शित हो जाएगा कि किसके पास फाइल रुकी है और कितने दिनों से रुकी है। दरअसल फाइल में क्या कमी है और किस वजह से रोकी गई है इसका पूरा ब्यौरा ऑनलाइन ही दिखेगा। ई-ऑफिस के लिए कर्मचारियों को दिया गया प्रशिक्षण ई-ऑफिस संचालन के लिए सभी सरकारी अधिकारी कर्मचारियों की आईडी बनाई जानी हैं। अभी तक जिले में 134 की आईडी बनाई जा चुकी हैं। जिन्हें ई-दक्ष केंद्र में ई- दफ्तर संचालन को लेकर प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। ई-ऑफिस से यह होगा फायदा कागजी कामकाज की प्रक्रिया में कमी आएगी। फाइलों का रिकॉर्ड अपडेट रहेगा ई-ट्रैकिंग की व्यवस्था होगी जिससे फाइल किस स्तर पर पहुंची हैं पता लगाया जा सकेगा। ई-ऑफिस की वजह से काम समयावधि में पूर्ण होगा। आम जन को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाना पड़ेंगे। कोई कर्मचारी छुट्टी पर गया है, सस्पेंड है या सेवानिवृत्त हुआ तो दूसरे कर्मचारी को सारी फाइलें डिजिटल रूप में मिल जाएंगी। डिजिटलीकरण होने से फाइलें और दस्तावेज गुम होने का डर नहीं रहेगा। डिजिटल ट्रैकिंग व प्रसंस्करण, कार्यों में पारदर्शिता और कुशलता लाएगा और इससे समय की बचत होगी।