इंदौर। स्कूलों में बच्चों को कमर्शियल संस्थाओं द्वारा दी जाने वाली स्पोर्ट्स ट्रेनिंग पर 18 प्रतिशत जीएसटी ली जा रही है। इसे लेकर उनमें असंतोष है। स्कूलों का तर्क है कि जब यहां दी जाने वाली ट्रांसपोर्ट, सिक्योरिटी और सफाई व्यवस्था जैसी पांच सेवाएं कर मुक्त हैं, तो फिर इसी पर कर का यह बोझ क्यों डाला गया है।
एसोसिएशन ऑफ अनएडेड सीबीएसई स्कूल्स और निसा एजुकेशन ट्रस्ट ने इसे कर मुक्त करने की मांग की है। उन्होंने जीएसटी काउंसिल को बताया कि किस तरह यह कर छात्रों और पालकों पर अतिरिक्त भार डाल रहा है।
एसोसिएशन के डायरेक्टर अनिल धूपर ने बताया ट्रांसपोर्ट जैसी वैकल्पिक सुविधा थर्ड पार्टी से लेने पर स्कूलों को टैक्स नहीं देना होता, पर खेल प्रशिक्षण पर टैक्स लगता है, यह विसंगतिपूर्ण है। जबकि खेलो इंडिया और न्यू एजुकेशन पॉलिसी के अंतर्गत फिजिकल फिटनेस के साथ ही स्कूल स्तर पर खेलों को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
7-8 खेलों से ज्यादा के लिए संसाधन जुटाना संभव नहीं
डेली कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल सुमेर सिंह ने बताया कि आज विश्व में 200 से ज्यादा खेल ओलिंपिक कमेटी द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। सीबीएसई ने 40 खेलों को अपनी सूची में रखा है। किसी भी एक स्कूल के लिए 7-8 से ज्यादा खेल का प्रशिक्षण अपने स्तर पर प्रदान करना संभव नहीं है, क्योंकि प्रत्येक खेल के लिए स्टाफ और विशेष संसाधनों की जरूरत होती है। ऐसे में स्कूल अपने छात्रों के लिए अकसर बाहरी संस्थाओं के माध्यम से ट्रेनिंग उपलब्ध करवाते हैं।