नीमच। संस्कार हमारे जीवन का आधार हैं। यदि संस्कार न हों तो व्यक्ति सामाजिक उत्तरदायित्वों और सहभागिता से वंचित रह जाता है। संस्कारों की पहली पाठशाला हमारा घर होता है, जहां माता-पिता से हमें मूल्य मिलते हैं, और उन्हीं से हमारा चरित्र, सोच और व्यवहार निर्मित होता है।यह बात राष्ट्र सेविका समिति की विभाग सेवा प्रमुख लक्ष्मी प्रेमाणी ने ग्राम सावन स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित कुटुंब प्रबोधन एवं मातृ सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण अति आवश्यक है। आज के भौतिक युग में ष्संस्कार शालाष् की महती आवश्यकता है। उन्होंने परोपकार को भी एक महत्वपूर्ण संस्कार बताया और कहा कि इसके बिना समाज में सामूहिक सहयोग और आत्मीयता संभव नहीं। प्रेमाणी ने यह भी कहा कि कुटुंब प्रबोधन एक सामाजिक आंदोलन है, जो भारतीय संस्कृति की मूल भावना को जीवित रखता है। डिजिटल युग में पीढ़ियों के बीच की खाई को कम करने के लिए परंपरा और आधुनिकता में संतुलन बनाना आवश्यक है।
कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति की सह सेवा प्रमुख ज्योति खंडेलवाल, नगर कार्यवाहिका ज्योति नरेला, और जिला प्रमुख राजेंद्र भट्ट विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महिला मंडल सावन की अध्यक्षा उर्मिला शर्मा ने की। संचालन नंदकिशोर सोनी द्वारा किया गया और आभार प्रदर्शन उर्मिला शर्मा ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभी माताओं को उपहार भेंट किए गए एवं कल्याण मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।