इन्दौर। देवास जिले में खिवनी में अतिक्रमण मुक्त कराये गए क्षेत्र से प्रभावित आदिवासी परिवार को हर संभव सहायता करने तथा मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए सभी प्रभावित परिवार को 6 माह का अतिरिक्त खादय् राहत सामग्री एवं त्रिपाल प्रदाय किये गये है। देवास वन विभाग द्वारा जारी प्रेसविज्ञप्ति अनुसार सभी परिवार को 20000 रुपये की सहायता राशी भी प्रदाय की गई है और पका हुआ भोजन भी उपलब्ध किया जा रहा है।
एसडीओ विकास माहोरे ने बताया कि अतिक्रमण बेदखली की कार्यवाही में 29 परिवारों के कुल 51 लोग प्रभावित हुए है, जिनमें से 49 के प्रधानमंत्री आवास पूर्व से स्वीकृत है और उनका पक्का मकान खिवनी खुर्द के राजस्व ग्राम में बना हुआ है तथा 2 लोग अपने परिवार के बने आवास में निवासरत है।
खिवनी वन्यजीव अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1955 में मध्य भारत वन्य पशु, पक्षी संरक्षण विधान 1952 की धारा 13 (1) के तहत की गई। जिसके पश्चात इसका विस्तार 1982 एवं 2006 में अधिसूचना प्रकाशित कर किया गया। जिसमें सीहोर जिले के क्षेत्र के अधिकारो का विनिश्चियन कलेक्टर जिला सीहोर द्वारा वर्ष 1997 और देवास कलेक्टर द्वारा वर्ष 1998 में कर दिया गया। इसके पश्चात वन अधिकार अधिनियम 2006 अंतर्गत 13 दिसम्बर 2005 के पूर्व बसे परंपरागत वन वासियों को अभ्यारण्य में वन भूमि पर नियमानुसार पट्टे प्रदाय कर दिये गये थे। इस कार्यवाही के पश्चात अभ्यारण्य में किसी भी व्यक्ति के अधिकारों को दिया जाना शेष नही रह गया। वर्ष 2016 से 2017 तक कुल 96 हिथ्ग्रहियों को 10 लाख मुआवजा कुल 9.6 करोड़ दिया जाकर विस्थापित किया गया था।
23 जून 2025 को अभ्यारण्य के कक्ष क्र. आर.एफ. 215, 209 एवं 203 में की गई अतिक्रमण बेदखली की कार्यवाही के एक माह पूर्व संबंधित अतिक्रमणकारियों को नियमानुसार नोटिस दिये गये थे। अतिक्रमणकारियों को सूचित किया गया था कि आपके द्वारा उक्त वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है जिसमें अपना अभिमत प्रस्तुत करने एवं उक्त भूमि से संबंधित उनके अधिकारों के वैद्य दस्तावेज प्रस्तुत करने हेतु लेख किया गया था। अतिक्रामको द्वारा भूमि के वैद्य दस्तावेज प्रस्तुत ना करने पर 14 जून 25 को बेदखली आदेश नियमानुसार जारी किये गये। सम्बंधित परिवारों को लगातार वर्ष 2022, 2023 , 2024 में भी स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने हेतु लगातार निर्देशित किया जा रहा था।