मंदसौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रारंभ किए गए जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से जिले की प्रमुख एवं प्राचीन और ऐतिहासिक बावड़ियां अपने मूल स्वरूप में दिखने लगी है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत, जिले की ऐतिहासिक धरोहर को नवजीवन मिला है। यह सफलता केवल विकास और जल संरचना के पुनरुद्धार की नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पर्यावरण संरक्षण दृष्टिकोण और जल संरक्षण को लेकर प्रतिबद्ध नेतृत्व ने इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप दिया है।
जिले की इन छः बावड़ियों में मंदसौर विकासखंड की मंदसौर अखाशा की बावड़ी, सात सहेलियों की बावड़ी, नागदेवता की बावड़ी। विकासखंड सीतामऊ में औखा बावड़ी, कयामपुर। विकासखंड गरोठ में छाजड़जी की बावड़ी, गरोठ। विकासखंड भानपुरा में गणेश मंदिर वाली बावड़ी केथुली शामिल हैं। जिला प्रशासन एवं जन अभियान परिषद के अथक प्रयास से अपने मूल स्वरूप में लौटी है। अभियान का ही परिणाम है कि, यह संरचना फिर से उपयोग लाने लाइक बन गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदर्शिता ने इन बावड़ियों को एक बार फिर जीवंत कर दिया है। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत यह कार्य न केवल एक संरचना का पुनरुद्धार है, बल्कि जल संरक्षण के प्रति मध्यप्रदेश सरकार की गहरी प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है।